कीचड़, गंदगी और बरसाती पानी...खरीदार, किसान और हम्मालों को भारी परेशानी
बारिश ने खोली थोक फल-सब्जी मंडी की बदहाल व्यवस्था
कोटा। गुरुवार को सुबह आठ बजे का समय। शहर की सबसे बड़ी थोक फल-सब्जी मंडी धीरे-धीरे खरीदारों, किसानों और व्यापारियों से गुलजार हो रही थी। ट्रकों से उतर रही ताजा सब्जियां, फलों की ढेरियां, लगती बोलियां और माल खरीदने की भागदौड़... लेकिन इस पूरे दृश्य के बीच सबसे ज्यादा नजर आ रहा था मंडी परिसर में फैला कीचड़, गंदगी और बरसाती पानी। रातभर हुई बारिश ने मंडी की व्यवस्थाओं की हकीकत फिर उजागर कर दी। परिसर की अधिकांश हिस्सा कीचड़ में बदल चुका था। कहीं पानी भरा था तो कहीं फिसलन भरा कीचड़। खरीदार कपड़ों और जूतों को बचाते हुए रास्ता तलाश रहे थे, जबकि हम्माल सिर और कंधों पर सब्जियों की भारी बोरियां उठाकर कीचड़ से गुजरने को मजबूर थे।
गंदगी के बीच लाखों का कारोबार
शहर की सबसे बड़ी थोक मंडी में हर रोज लाखों रुपए का फल और सब्जी कारोबार होता है। गुरुवार को भी कारोबार नहीं रुका। किसानों से माल खरीदने के लिए व्यापारियों की भीड़ लगी रही। होटल, रेस्टोरेंट और फुटकर विक्रेता बड़ी मात्रा में खरीदारी करते रहे, लेकिन हर कदम पर अव्यवस्थाएं उनका रास्ता रोकती नजर आईं। सब्जी लेकर आए किसानों ने बताया कि गांवों से ताजा माल तो समय पर पहुंच गया, लेकिन मंडी के अंदर उसे दुकानों तक पहुंचाना सबसे मुश्किल काम रहा। कीचड़ के कारण हाथ ठेले और छोटी गाड़ियां कई जगह फंस गईं। हम्मालों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी और माल उतारने में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक समय लगा।
अव्यवस्थाएं रोकती रहीं रास्ता
मंडी में खरीदारी करने आए ग्राहक रामहेत व दौलतचंद ने बताया कि विभिन्न तरह की सब्जियों की खरीदारी करने के लिए उन्हें गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ा। कई जगह फिसलन इतनी अधिक थी कि लोग संभल-संभलकर चलते दिखाई दिए। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते सफाई और जल निकासी नहीं हुई तो बारिश के पूरे मौसम में यही हाल बना रहेगा। इधर व्यापारियों ने कहा कि यह कोई नई समस्या नहीं है। हर बारिश के बाद मंडी की यही तस्वीर बन जाती है। जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से थोड़ी देर की बारिश भी पूरे परिसर को जलभराव में बदल देती है। इसका असर व्यापार की गति पर भी पड़ता है और ग्राहकों को भी भारी असुविधा होती है।
हर बारिश के बाद मंडी की यही स्थिति हो जाती है। कीचड़ और पानी भरने से ग्राहकों की संख्या प्रभावित होती है। माल उतारने और दुकानों तक पहुंचाने में भी काफी परेशानी होती है।
-विजय कुमार, फल-सब्जी व्यापारी
गांवों से ताजा सब्जियां और फल लेकर आते हैं, लेकिन मंडी में प्रवेश करते ही परेशानी शुरू हो जाती है। कीचड़ में माल ढोना मुश्किल हो जाता है। कई बार माल खराब होने का भी डर बना रहता है।
-बिरधीचंद मीणा, किसान
सब्जियां खरीदने के लिए मजबूरी में कीचड़ और गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी होती है। मंडी जैसी महत्वपूर्ण जगह पर ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए।
-शम्भूदयाल बैरवा, ग्राहक
बारिश के कारण कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। जहां-जहां पानी भरता है, वहां निकासी का कार्य कराया जाता है। व्यापारियों किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाते हैं।
-विश्वजीत सिंह, सचिव, थोक फल मंडी

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