पूछते-पूछते गंगाजी जाने जैसे हालात, एक दूसरे से पूछ कर चला रहे काम
एमबीएस की पुरानी बिल्डिंग में स्थापित चौकी में लगा था सिस्टम
कोटा । कहते हैं पूछते पूछते तो आदमी गंगाजी पहुंच जाता है। संभाग के सबसे बड़े एम.बी.एस. अस्पताल में यहीं हालात हैं। यहां मरीजों और उनके परिजनों को मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं है। 'पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम' पिछले 10 महीनों से खराब पड़ा है। पहले यह सिस्टम पुरानी बिल्डिंग की पुलिस चौकी में लगा हुआ था, जिसे बाद में न्यू ओपीडी में स्थानांतरित किया गया था। देखरेख के अभाव में अब यह नकारा हो चुका है और आलम यह है कि उद्घोषणा करने वाला यह सिस्टम फिलहाल एक कुर्सी पर पड़ा धूल चाट रहा है।अनाउंसमेंट सिस्टम बंद होने से रोजाना अस्पताल आने वाले हजारों मरीजों को पर्ची कटवाने, डॉक्टर का कमरा ढूंढने और एक्स-रे व अन्य जांचों की जानकारी के लिए एक-दूसरे से पूछताछ करनी पड़ रही है। दूर-दराज से आने वाले या पहली बार अस्पताल पहुंचे लोगों को सही जानकारी न मिलने के कारण पूरे परिसर के चक्कर काटने पड़ते हैं।
कतार में लगने के बाद पता चलता है गलत लाइन
अनाउंसमेंट न होने के कारण काउंटर पर लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद जब मरीज खिड़की पर पहुंचते हैं, तब उन्हें पता चलता है कि वे गलत लाइन में लगे थे। इस कारण पहले से ही बीमारी से जूझ रहे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। । दवाइयों की कमी होने पर मरीजों को पुरानी ओपीडी के काउंटर संख्या 121 पर भेज दिया जाता है। ऐसे में मरीजों को दवा पाने के लिए न्यू ओपीडी से पुरानी बिल्डिंग तक भटकना पड़ रहा है।
जेबतराशी और सतर्कता की सूचना देने वाला सिस्टम खामोश
ओपीडी पर तैनात होम गार्ड ने बताया कि यहां आने वाले ज्यादातर मरीज बाहर के जिलों से होते हैं, जिन्हें पूछताछ की सख्त जरूरत होती है। मरीज के साथ आये परिजन हर्ष गौत्तम ने बताया कि मेरा अक्सर यहां आना रहता है,पहले अनाउंसमेंट सिस्टम चालू था, तब माइक के माध्यम से मरीजों को डॉक्टरों के कमरों, जांच केंद्रों की स्पष्ट जानकारी के साथ-साथ जेबतराशों से सावधान रहने की हिदायतें लगातार दी जाती थीं। इसे चालू किया जाना चाहिये।
बाहरी जिलों से आए अभ्यर्थियों खासी परेशानी
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरियों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने आ रहे युवाओं को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंगानगर और हनुमानगढ़ की रहने वाली दो महिला अभ्यर्थियों का चयन कोटा में हुआ था। आँख का मेडिकल कराने आई दो महिला अभ्यर्थियों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्हें 15 तारीख से पहले अपना मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराना है। अस्पताल में पहली बार आने और पूछताछ केंद्र पर अत्यधिक भीड़ होने के कारण उन्हें सही कमरा ढूंढने में घंटों भटकना पड़ा।
स्टाफ का कहना—ठीक होने के लिए कहा गया है
पूछताछ केंद्र पर एक कुर्सी पर ढके पड़े सिस्टम के बारे में जब पूछताछ कक्ष के प्रभारी राहुल कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि यह लंबे समय से खराब है। इसे ठीक कराने के लिए संबंधित विभाग को सूचित कर दिया गया है।
मेरी जानकारी में नहीं था यह जरूरी चीज है इसे कल ही चैक करवाते है। यदि रिपेयर होने की स्थिति में है तो जल्द ही रिपेयर करवाकर शुरू करवा दी जायेगी। अस्पताल में आने वाले हर मरीज के समय की बचत व सुविधा से जुड़ी हर बात के लिये काम किया जायेगा।
- डॉ. राकेश सिंह अधीक्षक एमबीएस अस्पताल
यहां आने वाली महिलाऐं हो या आदमी सभी को सतर्क करने के लिये लगातार बोलते रहना पडता है। काफी दिनों से माईक खराब है ऐसे में कतारों में लगें परिजनों को घुम-घुम कर सुरक्षा व काउन्टरों की जानकारियां देते रहते है। अभी खराब है तो हमें ही लोगों के बीच खडा रह कर बार बार हिदायतें देनी पडती है।
- हेमराज , ओपीडी पर तैनात गार्ड

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