कोचिंग संस्थानों में प्रशासन की सख्ती, 31 जुलाई तक देनी होगी एक्जिट पॉलिसी
फायर एनओसी और काउंसलर की रिपोर्ट
जयपुर। कोचिंग संस्थाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए कोचिंग संस्थानों को 31 जुलाई तक एक्जिट पॉलिसी, फायर एनओसी और काउंसलर की रिपोर्ट संबंधी रिपोर्ट जिला प्रशासन को देने के निर्देश दिए है। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में कोचिंग संस्थानों के प्रतिनिधियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला कलक्टर संदेश नायक ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना सभी कोचिंग संस्थानों की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी कोचिंग संस्थान 31 जुलाई तक अपनी प्रमाणित ईजी एग्जिट नीति जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर विद्यार्थियों को संस्थान छोड़ने में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े। साथ ही फीस संबंधी विवादों के त्वरित एवं पारदर्शी समाधान के लिए स्पष्ट एग्जिट नीति का लिखित रूप में उपलब्ध होना सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में निर्णय लिया कि सभी कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, भवन स्ट्रक्चरल सुरक्षा तथा छात्र-छात्राओं के मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से जुड़े विषयों पर नियमित प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे। जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि प्रत्येक संस्थान में नियुक्त गेटकीपरों का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाए तथा 30 जुलाई तक प्रशिक्षण पूर्ण कर शपथ पत्र जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया जाए। जो संस्थान स्वयं प्रशिक्षण आयोजित करने में सक्षम नहीं होंगे, उनके लिए जिला प्रशासन द्वारा नि:शुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी।
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को सवार्ेच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक कोचिंग संस्थान में पर्याप्त संख्या में मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक एवं काउंसलर नियुक्त करने तथा उनकी सूची एवं संपर्क विवरण 31 जुलाई तक जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक कोचिंग संस्थान में प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए। साथ ही ऑफलाइन अध्ययनरत विद्यार्थियों के ऑनलाइन माध्यम में तथा ऑनलाइन अध्ययनरत विद्यार्थियों के ऑफलाइन माध्यम में स्थानांतरण स्विचिंग के संबंध में प्रत्येक संस्थान स्पष्ट नीति तैयार कर 30 जुलाई तक जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने के संस्था प्रधानों को निर्देश दिए।

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