करूर भगदड़ पर फिर गरमाई सियासत: पीड़ित परिवारों से मिले सीएम विजय, 32 परिजनों को सौंपेंगे सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र

वामपंथी दलों ने किया विरोध

करूर भगदड़ पर फिर गरमाई सियासत: पीड़ित परिवारों से मिले सीएम विजय, 32 परिजनों को सौंपेंगे सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पिछले साल राजनीतिक रैली में हुई भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र सौंपे हैं। हालांकि, सरकार को समर्थन दे रहे वामपंथी दलों ने इस वित्तीय फैसले का कड़ा विरोध करते हुए इसे एक गलत परंपरा बताया है।

चेन्नई। पिछले वर्ष एक राजनैतिक कार्यक्रम के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की जान जाने की दुखद घटना के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और 'तमिलगा वेट्री कषगम' (टीवीके) के संस्थापक सी. जोसेफ विजय शुक्रवार को पहली बार करूर पहुंचे। विजय यहाँ पीड़ित परिवारों से मुलाकात करेंगे और उन्हें अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौपेंगे। सरकार को हालांकि बाहर से समर्थन दे रहे दो वामपंथी दलों ने पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री चेन्नई से विमान द्वारा त्रिची और वहां से सड़क मार्ग द्वारा करूर पहुंचे। मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद वह यहाँ अपने पहले आधिकारिक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। वह करूर-सेलम बाईपास मार्ग पर स्थित एटलस कलैयारंगा मैदान में एक विशाल जनसभा को भी संबोधित करेंगे और लाभार्थियों को कल्याणकारी सहायता वितरित करेंगे।

विजय अपने इस दौरे के दौरान उस भयावह भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी संवेदना व्यक्त करेंगे। वह पीड़ित परिवारों के 32 सदस्यों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री यहाँ लगभग 1,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले एक निजी जूता-चप्पल (गैर-चमड़ा) निर्माण कारखाने की आधारशिला रखेंगे, जिससे राज्य के लगभग 13,500 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री की सुरक्षा और इस कार्यक्रम को देखते हुए पूरे करूर में लगभग 6,500 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 27 सितंबर को करूर के वेलुसामीपुरम में टीवीके के चुनाव प्रचार के दौरान विजय की रैली में अत्यधिक भीड़ होने के कारण भगदड़ मच गयी थी। इस हादसे से व्यथित होकर विजय को अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर चेन्नई लौटना पड़ा था। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी है और जांच एजेंसी पूछताछ के लिए विजय को कई बार दिल्ली भी बुला चुकी है। विजय इससे पहले भी पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपये की सहायता दे चुके हैं और महाबलीपुरम के पास एक निजी विश्राम गृह (रिसॉर्ट) में उनसे मुलाकात कर चुके हैं।

जहां द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक), अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस हादसे के लिए सीधे-सीधे विजय को जिम्मेदार ठहराते हैं। वहीं, टीवीके इसके लिए तत्कालीन द्रमुक सरकार की साजिश को जिम्मेदार मानती है। सीएम की यात्रा के बीच टीवीके के वरिष्ठ नेता और लोक निर्माण मंत्री आधव अर्जुना ने द्रमुक पर साजिश के आरोपों को फिर से दोहराया है। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री के इस दौरे से ठीक पहले द्रमुक ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर विजय और उनके मंत्रियों को पीड़ित परिवारों से मिलने से रोकने की मांग की थी। द्रमुक का आरोप था कि मुख्यमंत्री के इस दौरे से चल रही जांच के गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है।

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न्यायमूर्ति विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने हालांकि राजनीतिक द्वेष के लिए न्यायालय का इस्तेमाल करने पर द्रमुक की कड़ी आलोचना की और कहा कि मुख्यमंत्री इस मामले में आरोपी नहीं हैं। इसके बाद द्रमुक ने अपनी याचिका वापस ले ली। इसके साथ ही द्रमुक ने जांच की निगरानी कर रहे सेवानिवृत्त न्यायाधीश अजय रस्तोगी को भी एक पत्र सौंपकर गवाहों को प्रभावित होने से बचाने के लिए सीबीआई को उचित निर्देश देने की मांग की है।

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इस बीच, मुख्यमंत्री द्वारा पीड़ित परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने के फैसले का भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने खुलकर विरोध किया है। माकपा के राज्य सचिव पी. शन्मुगम और भाकपा के तिरुपुर से सांसद के. सुब्बारायन ने कहा कि किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम में हुए हादसे के पीड़ितों को सरकारी सेवा में शामिल करना एक गलत और खतरनाक परंपरा की शुरुआत होगी।

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विपक्ष के नेताओं ने कहा कि किसी भी राजनीतिक आयोजन में होने वाली दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा या सहायता देने की पूरी जिम्मेदारी उस कार्यक्रम का आयोजन करने वाले राजनैतिक दल की होती है। टीवीके इस जिम्मेदारी को उठाने में पूरी तरह सक्षम है, इसलिए सरकार पर इसका वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। वामपंथी नेताओं ने मुख्यमंत्री से इस फैसले पर गहराई से विचार करने और इसे वापस लेने का आग्रह किया है।

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