खिलाड़ियों के सपनों पर बदहाल मैदान मार रहे किक : खेल प्रतिभाओं को नहीं मिल रहा 'होम ग्राउंड'

खेल मानकों के तहत एक भी मैदान नहीं तो मेडल कहां से आएंगे?

खिलाड़ियों के सपनों पर बदहाल मैदान मार रहे किक : खेल प्रतिभाओं को नहीं मिल रहा 'होम ग्राउंड'
प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिला तो सपने भी अधूरे रह जाएंगे।

कोटा । देश में फुटबॉल के प्रति बढ़ते उत्साह और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बावजूद कोटा शहर में फुटबॉल की बुनियादी सुविधाएं आज भी गंभीर संकट से जूझ रही हैं। शहर में खेल मानकों के अनुरूप एक भी ऐसा फुटबॉल मैदान नहीं है, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा सकें। मैदानों की बदहाल स्थिति, सीमित संसाधन और खेल सुविधाओं के अभाव का सीधा असर उभरती प्रतिभाओं पर पड़ रहा है। शहर में करीब चार से पांच ऐसे मैदान हैं जहां फुटबॉल खेली जा सकती है, लेकिन अधिकांश मैदान जर्जर अवस्था में हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय वोकेशनल ग्राउंड है, जिसकी हालत पिछले करीब दो वर्षों से खराब बनी हुई है। यही वह मैदान है, जहां से कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे खिलाड़ियों ने अपने खेल की शुरुआत की थी। आज उसी मैदान पर गड्ढे, उबड़-खाबड़ सतह और अव्यवस्थाओं के कारण नियमित अभ्यास तक मुश्किल हो गया है।

एक मैदान पर कई खेल, खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ रहा असर
शहर के नयापुरा स्थित उम्मेद सिंह स्टेडियम और श्रीनाथपुरम स्टेडियम में फुटबॉल खिलाड़ी अभ्यास तो करते हैं, लेकिन इन मैदानों पर अन्य खेलों के खिलाड़ी भी अभ्यास करते हैं। इसके अलावा समय-समय पर आयोजित होने वाले सामाजिक एवं सरकारी कार्यक्रमों के कारण मैदान कई दिनों तक खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध नहीं रह पाते। ऐसे में फुटबॉल खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास का अवसर नहीं मिल पाता। शहर में सरकारी स्तर पर महिला वर्ग के दो और पुरुष वर्ग के सात से आठ फुटबॉल कोच कार्यरत हैं, जबकि निजी स्तर पर भी आठ से दस कोच खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बावजूद इसके खिलाड़ियों के लिए समुचित खेल मैदान और आधुनिक सुविधाओं वाली सरकारी फुटबॉल अकादमी का अभाव दिखाई देता है।

सुविधाओं के अभाव में घट रहा रुझान, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का सपना अधूरा
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि फुटबॉल ऐसा खेल है जो बच्चों में टीम भावना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और शारीरिक फिटनेस विकसित करता है। लेकिन शहर में सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों का रुझान धीरे-धीरे व्यक्तिगत खेलों की ओर बढ़ने लगता है। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। वर्तमान में कोटा में ऐसा कोई मैदान उपलब्ध नहीं है, जहां राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित कराई जा सके। यदि खेल अवसंरचना को समय रहते विकसित नहीं किया गया तो शहर की प्रतिभाएं आगे बढ़ने से पहले ही संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देंगी।

खेल मानकों के अनुरूप एक भी फुटबॉल मैदान नहीं
-4–5 मैदान हैं, लेकिन अधिकांश जर्जर हालत में।
-वोकेशनल ग्राउंड करीब 2 साल से बदहाल।
-राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता कराने लायक मैदान का अभाव।
-सरकारी फुटबॉल अकादमी नहीं।
-लड़कों के लिए केवल हॉस्टल, सुविधाएं सीमित।
-महिला वर्ग के 2 और पुरुष वर्ग के 7–8 सरकारी कोच।
-8–10 निजी कोच खिलाड़ियों को दे रहे प्रशिक्षण।
-एक ही मैदान पर कई खेल और अन्य कार्यक्रम होने से अभ्यास प्रभावित।

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खिलाड़ी बोले...
बारिश के बाद मैदानों की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि कई दिनों तक अभ्यास नहीं हो पाता। अच्छी सुविधाएं मिलें तो हम भी बड़े स्तर पर शहर का नाम रोशन कर सकते हैं।
- हर्षित शर्मा, युवा फुटबॉल खिलाड़ी

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प्रतियोगिताओं से पहले नियमित अभ्यास सबसे जरूरी होता है, लेकिन मैदान उपलब्ध नहीं होने से हमारी तैयारी प्रभावित होती है।
-आदित्य मीणा, खिलाड़ी

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कोटा शिक्षा नगरी के साथ खेल नगरी भी बन सकता है, लेकिन इसके लिए आधुनिक फुटबॉल मैदान और खेल सुविधाओं का विकास जरूरी है। जब तक खिलाड़ियों को बेहतर मैदान और सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक शहर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर तैयार करना मुश्किल होगा। खेलों में निवेश भविष्य की पीढ़ी में निवेश है। जरूरत इस बात की है कि खेल मैदानों को केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की प्रयोगशाला माना जाए। यदि प्रशासन और सरकार समय रहते फुटबॉल मैदानों का विकास, आधुनिक सुविधाएं और समर्पित अकादमी उपलब्ध कराएं तो कोटा की धरती एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बहतरिन फुटबॉल खिलाड़ी तैयार कर सकती है।
-राहुल शर्मा, खेल प्रेमी

लड़कों के लिए केवल हॉस्टल की व्यवस्था है, लेकिन सरकारी फुटबॉल अकादमी नहीं है। हॉस्टल परिसर में बना फुटबॉल मैदान भी पिछले दो वर्षों से खराब स्थिति में है। कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि मैदान विकसित हो जाए तो शहर से राष्ट्रीय स्तर के और अधिक खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
-तीरथ सांगा, जिला फुटबॉल संघ सचिव

शहर में मैदान तो हैं, लेकिन किसी की भी स्थिति खेल योग्य नहीं है। बड़े मैदानों पर कई खेल एक साथ संचालित होते हैं, जिससे फुटबॉल का नियमित अभ्यास प्रभावित होता है। फुटबॉल टीम गेम है और इसके लिए समर्पित मैदान की आवश्यकता होती है।
-मीनू सोलंकी, सरकारी फुटबॉल कोच

शहर में फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए खेल मानकों के अनुरूप मैदान उपलब्ध नहीं है। खेल विभाग के अधीन एक भी खेल मैदान नहीं है। शहर के अधिकांश मैदान या तो यूआईटी (नगर विकास न्यास) अथवा नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार आग्रह किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मैदानों के अभाव में खिलाड़ियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि विभाग इस दिशा में लगातार प्रयासरत है।
-वाई बी सिंह, जिला खेल अधिकारी

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