सफेद हाथी बन गया रिवर फ्रंट का घाटा, अभी तक नहीं दी दुकानें भी किराए पर

केडीए को नहीं मिल रही रिवर फ्रंट का संचालन करने वाली फर्म

सफेद हाथी बन गया रिवर फ्रंट का घाटा, अभी तक नहीं दी दुकानें भी किराए पर

रोजाना करीब 15 सौ पर्यटकों के प्रवेश टिकट और शादियों व शूटिंग की बुकिंग शामिल है।

कोटा। कांग्रेस सरकार के समय में नगर विकास न्यास द्वारा बनाए गए विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल चम्बल रिवर फ्रंट का संचालन करना बड़ी चुनौती बनती जा रही है। इसका संचालन करने वाली फर्म ही नहीं मिल रही है। जिससे रिवर फ्रंट से केडीए का हर महीने का घाटा कम नहीं हो रहा है। चम्बल नदी के दोनों छोर पर करीब 1442 करोड़ की लागत से बने रिवर फ्रंट का संचालन वर्तमान में कोटा विकास प्राधिकरण  द्वारा ही किया जा रहा है। यहां की व्यवस्थाओं के लिए गुरुग्राम की फर्म द्वारा मेनपावर उपलब्ध करवाई हुई है। जिसकी एवज में केडीए को हर महीने करीब एक से सवा करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ रहा है। उसके अलावा बिजली का बिल समेत अन्य व्यवस्थाओं पर भी केडीए को करीब एक करोड़ का खर्चा करना पड़ रहा है। हर महीने करीब दो करोड़ से अधिक का खर्चा करने के बाद भी केडीए को केवल आधी ही एक करोड़ रुपए करीब ही आय हो रही है। जिसमें  रोजाना करीब 15 सौ पर्यटकों के प्रवेश टिकट और शादियों व शूटिंग की बुकिंग शामिल है। 

अभी तक नहीं दी दुकानें भी किराए पर
केडीए की ओर से पूर्व में यहां दोनों छोर पर बनी दुकानों को किराए पर देने की योजना थी। लेकिन जब दुकानों से लेकर पूरे रिवर फ्रंट का संचालन एक ही फर्म को देने की योजना बनी तो अभी तक उन दुकानों को भी किराए पर नहीं दिया जा सका है। 

हर साल 6 करोड़ देने को कोई तैयार नहीं
केडीए की ओर से जिस तरह से रिवर फ्रंट संचालन का टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया था। उस हिसाब से पहले साल में जो भी फर्म इसका संचालन करेगी उसे केडीए को कुछ नहीं देना होगा। दूसरे साल में 1.80 करोड़  रुपए सालाना केडीए को देना होगा। तीसरे साल में 3 करोड़ और चौथे साल में फर्म द्वारा 6 करोड़ रुपए वार्षिक केडीए को देना होगा। चौथे साल में जो फर्म 6 करोड़ या उससे अधिक का भुगातन केडीए को कर सकेगा उसी फर्म को इसका  ठेका दिया जाएगा। यह ठेका 20 साल के  लिए दिया जाना है। जानकारों के अनुसार हालत यह है कि अभी तक इतनी अधिक राशि का भुगतान करने वाली कोई भी फर्म केडीए को नहीं मिली है। जबकि वर्तमान में केडीए को हर महीने घाटा हो रहा है और केडीए मेन पावर उपलब्ध करवाने वाली फर्म को भुगतान कर रही है। जबकि केडीए के टेंडर डॉक्यूमेंट के अनुसार फर्म को उस घाटे को सहन करते हुए केडीए को भुगतना करना होगा।  सूत्रों का कहना है कि जब तक फर्म को इससे कमाई नहीं होगी तब तक कोई भी फर्म इसे लेकर नुकसान में नहीं जाना चाहती। ऐसे में यह केडीए के लिए सफेद हाथी बन गया है। 

बोट संचालक फर्म ने दी चुनौती
सूत्रों के अनुसार रिवर फ्रंट का संचालन एक ही फर्म को देने का जैसे ही टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार हुआ और आॅनलाइन अपलोड किया गया। वैसे ही रिवर फ्रंट एरिया में बोट संचालन फर्म ने केडीए को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। सूत्रों के अनुसार संचालक फर्म का कहना है कि उनका 15 साल का एमओयू हुआ है। ऐसे  में केडीए अब इसे किसी ओर को कैसे दे सकता है। इस संबंध में केडीए की ओर से कोर्ट में जवाब भी पेश किया गया है। 

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एक ही फर्म को देने की योजना
रिवर फ्रंट से केडीए को हर महीने हो रहे घाटे को कम करने के लिए केडीए द्वारा इसका संचालन एक ही फर्म को देने की योजना है। जिसके लिए केडीए द्वारा टेंडर डॉक्यूमेंट तैयार किया गया था। ुजिसे आॅनलाइन अपलोड किया गया। करीब एक माह से अधिक का समय होने पर जयपुर की सिर्फ एक ही फर्म ने इसके संचालन के लिए टेंडर डाला। लेकिन वह फर्म भी तकनीकी बिड़  में सफल नहीं हो सकी। जिससे टेंडर को निरस्त करना पड़ा। उसके बाद से अभी तक दोबारा नया टेंडर नहीं किया जा सका है। 

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पर्यटन को बढ़ावा देने के हों प्रयास
चम्बल रिवर फ्रंट न केवल कोटा वासियों के लिए वरन् पूरे देश में पर्यटन का बेहतर स्थल बना है। इसे देखने के लिए देशी विदेशी पर्यटक आ रहे हैं। इसका निर्माण करने में जनता के करोड़ों रुपए खर्च हुए हैं। ऐसे में इसे कमाई का जरिया बनाने के स्थान पर पर्यटन को बढ़ाने देने  के लिए इसका देश विदेश व पर्यटन टूर में शामिल करने का प्रयास करना चाहिए। देशी विदेशी पर्यटक अधिक आएंगे तो आय भी बढ़ेगी। 
-महेश अग्रवाल, इंद्र विहार

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प्रचार-प्रसार हो तो कई फर्म आ सकती हैं
 रिवर फ्रंट अपने आप में अनोखा पर्यटन स्थल बनाया गया है। इसका संचालन करना वैसे तो आसान नहीं है। लेकिन केडीए अधिकारी यदि प्रयास करें और इसका उचित माध्यम से सही जगह पर प्रचार-प्रसार करें। देश विदेश में इस तरह के पर्यटन स्थलों का संचालन करने वाली बड़ी फर्मो से सम्पर्क करें तो ऐसी कई फर्म मिल सकती हैं जो इसका लाभ के साथ संचालन कर पाएंगी। घाटे में होने से इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए। वरन् इसे बढ़ावा देने के प्रयास होने चाहिए। 
-रिंकल माहेश्वरी, राजीव गांधी नगर 

इनका कहना है
चम्बल रिवर फ्रंट को एक ही फर्म द्वारा संचालित करने के लिए इसका टेंडर जारी किया था। जयपुर की एक फर्म ने टेंडर डाला था। लेकिन वह फर्म सफल नहीं हो सकी। जिससे टेंडर को निरस्त करना पड़ा। फिलहाल अभी इसका दोबारा से कोई टेंडर नहीं किया गया है। वर्तमान स्थिति जस की तस है। रिवर फ्रंट का संचालन वर्तमान में केडीए द्वारा ही किया जा रहा है। भविष्य में उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।  
-महेन्द्र सक्सेना, एक्सईएन, कोटा विकास प्राधिकरण 

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