काल का गाल बन रही शहर के बीच से निकल रही नहरें

कई जगह से हो रही क्षतिग्रस्त

काल का गाल बन रही शहर के बीच से निकल रही नहरें
पिछले साल मार्च में भी नहर में डूबने की घटनाएं हुई थी जिसमें चार युवकों की मौत हो गई थी।

कोटा । शहर के बीच से निकल रही दांयी व बांयी मुख्य नहर में आए दिन लोगों के डूबने की घटनाएं हो रही हैं। उसके बाद भी न तो लोग समझ रहे हैं और न ही पुलिस व प्रशासन चेत रहे हैं। पिछले साल होली पर भी चार युवकों की नहर में डूबने से मौत हो चुकी है। बोरखेड़ा थाना क्षेत्र में शनिवार को नहर में नहाते समय  दो युवक बह गए। यह पहला मौका नहीं है जब नहर में नहाते समय युवक डूबे हों। उसके बाद भी न तो पुलिस प्रशासन चेता है और न ही लोग सचेत हुए हैं। जिसका खामियाजा उस परिवार को भुगतना पड़ रहा है। 

यह हैं दुर्घटना का पॉइंट
शहर के बीच से निकल रही दांयी व बायी मुख्य नहर में केवल एक दो जगह ही ऐसी नहीं है जहां लोग नहाते हैं। वरन् नहर  पर जगह-जगह इस तरह के दृश्य देखे जा सकते हैं। फिर चाहे वह कुन्हाड़ी क्षेत्र का इलाका हो या किशोरपुरा गोविंद धाम के पास। गुमानपुरा का क्षेत्र हो या नाग नागिन मंदिर रोड। बोरखेड़ा का क्षेत्र हो या थेगड़ा का।  थर्मल चौराहे से नांता रोड के बीच भी नहर  की चार दीवारी क्षतिग्रस्त हो रही है। शनिवार को भी कई जगह पर लोग नहाते हुए मिले। 

पिछले साल धुलंडी पर हुआ था हादसा
पिछले साल मार्च 2022 में भी नहर में डूबने की घटनाएं हुई थी। जिसमें चार युवकों की मौत हो गई थी। धुलंडी के  दिन होली खेलने के बाद कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित बांयी मुख्य नहर में अलग-अलग जगह पर नहाने गए तीन युवकों का पैर फिसलने से डूबने पर मौत हो गई थी। जिससे त्योहार के दिन उन परिवारों में मातम छा गया था।  वहीं उद्योग नगर थाना क्षेत्र में भी एक युवक की डूबने से मौत हो गई थी। एक ही दिन में दो थाना क्षेत्रों में एक साथ चार युवकों की मौत से  पुलिस व प्रशासन के अधिकारी हरकत में आए थे। 

कलक्टर एसपी ने जारी किए थे आदेश
मार्च 2022 में धुलंडी के दिन हुए हादसे के बाद तत्कालीन जिला कलक्टर व पुलिस अधीक्षक ने आदेश जारी दिए थे। जिसमें सभी संबंधित थाना अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि नहर में कोई भी व्यक्ति नहाने नहीं जाए। इसके लिए थाने का जाब्ता नियमित गश्त करेगा और निगरानी रखेगा। इस आदेश की कुछ समय तक तो पालना हुई। लेकिन अधिकारियों के बदलने के साथ ही आदेश भी हवा हो गए।  जिससे फिर से वही पुराना ढर्रा शुरु हो गया। शहर में जगह पर लोग विशेष रूप से बच्चे व युवाओं को नहरों पर नहाते हुए देखा जा सकता है। 

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क्षतिग्रस्त हो रही नहरें
शहर के बीच से निकल रही नहर की चार दीवारी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। जिससे वहां से नहर में नीचे की तरफ जाने की लोगों को जगह मिल रही है। जिससे लोग काफी देर तक नहरों में नहाते रहते हैं। कई लोग नशा करने के बाद भी नहर में नहाने चले जाते हैं। जिससे उनके पैर फिसलने व डूबने की घटनाएं हो रही हैं। नाग नागिन मंदिर से 80 फीट रोड स्टिल ब्रिज के बीच नहर की चार दीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। हालांकि सीएडी कीओर से कुछ समय पहले चार दीवारी को सही भी कराया गया था। लेकिन उसके बाद भी वह कई जगह से टूटी हुई है। जहां से लोग नहाने के लिए नीचे तक जा रहे हैं। उद्योग नगर थाना क्षेत्र में शिवाजी पार्क के पीछे कंसुआ और डीसीएम की तरफ जा रही नहर में कई जगह पर नहर के दीवारों में मोखे हो रहे हैं। जिससे लोग वहां नहाने के लिए जा रहे हैं।  थेगड़ा रोड पर भैरूजी मंदिर के पास भी नहर की चार दीवारी कई जगह से क्षतिग्रस्त है। बोरखेड़ा से काला तालाब की तरफ जाने वाले रास्ते में भी नहर की चार दीवारी काफी जगह से क्षतिग्रस्त हो रही है। वर्तमान में नहर में पानी छोड़ा हुआ है। जिससे लोग उसमें नहाने जा रहे हैं।  नांता की तरफ नहर में भी दिनभर बच्चों को कूदकर नहाते हुए देखा जा सकता है। 

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नहरों की समय-समय पर मरम्मत करवाई जाती है। लोगों को नहर में पानी छोड़ने के दौरान नहाने से मना किया हुआ है। लेकिन उसके बाद भी लोग नहीं समझते हैं। जिससे इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं। बजट आने पर जहां से भी नहरें क्षतिग्रस्त हैं उन्हें सही करवा दिया जाएगा। 
- एम.पी. सामरिया, अधीक्षण अभियंता, सिचाई विभाग

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नहरों पर होली के समय में पुलिस की ओर से निगरानी व गश्त की जाती है। जिससे उस समय कोई नहर में नहाने नहीं जाए। जिससे हादसों को रोका जा सके। अन्य दिनों में यह काम सिचाई विभाग व निगम प्रशासन का है। नहर में नहाने से लोगों को बचना चाहिए।  
- शरद चौधरी, एसपी कोटा शहर 

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