बरसात में फिर बढ़ गया गायों की मौत का आंकड़ा

नगर निगम की गौशाला में रोजाना हो रही 10 से अधिक गायों की मौत

बरसात में फिर बढ़ गया गायों की मौत का आंकड़ा

बरसात में कीचड़ होने से गौवंश के फिलसने का खतरा अधिक रहता है।

कोटा। नगर निगम की गौशाला में गायों की मौत का आंकड़ा बरसात में एक बार फिर से बढ़ गया है। यहां रोजाना 10 से अधिक गौवंश की मौत हो रही है। नगर निगम की बंधा धर्मपुरा स्थित गौशाला में जहां वर्तमान में मात्र करीब 2 हजार ही गौवंश है। पिछले कुछ महीनों में इनकी संख्या आधी रह गई है। इसका कारण एक तो यहां से जिले की अन्य गौशालाओं को करीब 11 सौ से अधिक गौवंश को शिफ्ट करना है। वहीं दूसरा कारण गौवंश की लगातार हो रही मौत है। गौशाला में गायों की अधिक मौत का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। कुछ समय पहले यहां मौत का आंकड़ा कम होकर 5 से 6 के बीच हो रह गया था। लेकिन बरसात का सीजन शुरू होते ही एक बार फिर से गायों की मौत अधिक होने लगी है। 

बरसात में कीचड़ और बैठक लेने से होती मौत
गौशाला में पहले जहां क्षमता से अधिक गौवंश था तो उन्हें घूमने की जगह नहीं मिल पा रही थी। जिससे उनकी आपस में टकराने से मौत हो रही थी। वर्तमान में वहां इनकी संख्या तो कम हो गई है लेकिन गौशाला में जिस तरह का कच्चा व पक्का फर्श है। उस पर बरसात में कीचड़ होने से गौवंश के फिलसने का खतरा अधिक रहता है। जिससे वे एक बार बैठक लेने के बाद उठ नहीं पाती हैं। ऐसे में कुछ समय बाद उनकी मौत हो जाती है। 

बीमार गाय अधिक होना भी कारण
जानकारों के अनुसार निजी गौशालाओं में जहां स्वस्थ गाय अधिक हैं। वहां अधिकतर दूध देने वाली गाय हैं। जिनकी देखभाल व खानपान भी अच्छा होता है। जबकि निगम की गौशाला में अधिकतर बीमार व लावारिस हालत में ही गौवंश आते हैं। जिससे उनकी मौत अधिक हो रही है। 

पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण
गौशाला समिति के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह ने बताया कि गौशाला में गौवंश की अधिक मौत का कारण जानने के लिए ही गत दिनों निगम अधिकारियों व महापौर की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों की टीम ने तीन गायों का पोस्ट मार्टम किया था। जिसमें उनके पेट से पॉलिथीन निकली थी। उसकी मात्रा अधिक होने से ही गायों की मौत हो रही है। बरसात में यह आंकड़ा हमेशा बढ़ जाता है। 

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11 सौ से अधिक को किया शिफ्ट
गौशाला से करीब 11 सौ से अधिक गौवंश को जिले की निजी गौशालाओं में शिफ्ट कर दिया है। जिससे इनकी संख्या तो सीमित हो गई है। लेकिन बरसात में फिर से गौवंश की मौत का आंकड़ा कुछ बढ़ा है। कुछ समय पहले तक जहां गौवंश की मौत का आंकड़ा 5 या उससे कम हो गया था। वह बरसात में बढ़कर 10 या उससे अधिक हो गया है। इसे रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। बरसात में कीचड़ की सफाई करवाने व बाड़ों को सही करने का काम किया जा रहा है। साथ ही गौशाला में निर्माण के काम भी शुरू हो गए हैं। 
- दिनेश शर्मा, प्रभारी गौशाला, नगर निगम कोटा दक्षिण

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