हीटवेव के साथ आग की घटनाएं बढ़ने पर भयावह होगी स्थिति, सामान्य से अधिक रहेगा तापमान
इस बार गर्मी में सामान्य से दोगुनी चलेंगी हीटवेव
आग की घटनाएं भी तीन माह में होती हैं करीब 70 फीसदी।
कोटा। प्रदेश के अन्य जिलों के साथ ही कोटा में भी इस बार जहां मार्च से ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरु कर दिए हैं। ऐसे में गर्मी के तीन माह अप्रैल से जून में इस बार गर्मी अधिक होने के साथ ही हीटवेव(लू) भी सामान्य से करीब दो गुना चलने की संभावना है। ऐसे में आग की घटनाएं अधिक होने से स्थिति भयावह होने का खतरा है। मौसम में हो रहे बदलाव का असर अप्रैल से जून के तीन माह में देखने को मिलेगा। हालांकि पिछले साल भी कोटा समेत पूरे प्रदेश में गर्मी सामान्य से अधिक रही थी। जिससे सरकार व प्रशासन को गर्मी से राहत के विशेष इंतजाम करने पड़े थे। वहीं इस बार भी ऐसी ही स्थिति बनने की संभावना है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार इस बार प्रदेश में हीटवेव सामान्य से करीब 85 फीसदी अधिक यानि दो गुनी चलने का अनुमान है। गर्मी में आग लगने की घटनाएं अधिक होने पर उन पर काबू पाने के लिए जहां निगम समेत अन्य विभागों की दमकलें दिनभर दौड़ती रहती है। वहीं आग बढ़ने पर उससे जान-माल का नुकसान होने का खतरा अधिक रहता है। साथ ही जिस जगह घटना होती है वहां के अलावा अन्य लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शॉर्ट सर्किट से आग 70 फीसदी तक
गर्मी में तापमान अधिक होने व हीटवेव चलने से शहरी क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं भी अधिक हो जाती है। ये घटनाएं अधिकतर शॉर्ट सर्किट से होती है। फिर चाहे वह एसी में हो या जबजली के पैनल बॉक्स में। नगर निगम कोटा दक्षिण के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि गर्मी में तापमान अधिक होने पर उससे राहत के लिए ’यादातर लोग घरों व कार्यालयों में एसी व कूलर का उपयोग करने लगे है। जिससे बिजली का लोड बढ़ने पर इसके बार-बार ट्रिप होने, तारों में स्पार्किंग होने व शॉर्ट सर्किट के मामले बढ़ जाते है। शॉर्ट सर्किट से निकली एक चिंगारी आग लगाने के लिए काफी होती है। हालांकि नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से आग की किसी भी घटना से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। लेकिन उससे अधिक दमकलों के पहुंचने से पहले आग पर काबू के लिए लोगों को स्वयं भी सावधानी व इंतजाम रखने होंगे। व्यास ने बताया कि शहर में हर साल करीब एक हजार से अधिक आग लगने की घटनाएं होती है। उनमें से करीब 600 स 700 यानि 60 से 70 फीसदी घटनाएं अप्रैल से जून के तीन माह में ही हो जाती है। व्यास ने बताया कि जबकि वर्तमान में जो आग की घटनाएं हो रही हैं वह ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक है। वह भी वन क्षेत्र में सूखी घास व झाड़ियों में और खेतों की फसल में आग की अधिक है।
सामान्य से अधिक रहेगा तापमान
मौसम विभाग जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इस बार सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। साथ ही हीटवेव भी करीब 85 फीसदी अधिक चलेगी। हालांकि बीच-बीच में आ रहे वेदर सिस्टम के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव का क्रम बना हुआ है। जिससे तापमान अधिक होने के बाद फिर से कम हो रहा है। वैसे मई और जून गर्मी का पीक समय है।
ये रखें सावधानी
सीएफओ व्यास ने बताया कि आग की घटनाओं को कम करने के लिए समय-समय पर वायरिंग की जांच करते रहे। कहीं कट लगा हो तो उसे सही करवा ले। बिजली के ट्रिप होने पर लाइट को बंद कर दे। रात के समय दुकान व शोरूम से जाते समय लाइट व मेन स्विच बंद करके जाए। साथ ही छोटे फायर उपकरण, पानी व रेत की बाल्टी भरकर जरूर रखे। जिससे समय रहते आग के बढ़ने से रोका जा सके। व्यास ने बताया कि नगर निगम उत्तर दक्षिण में 4 फायर स्टेशन है। साथ ही करीब 34 दमकलें, दो बड़ी हाइड्रोलिक दमकलें और पर्याप्त फायरमेन और अधिकारी हैं।
प्रशासन हुआ सतर्क
इधर इस बार गर्मी अधिक होने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग और नगर निगम सतर्क हो गए हैं। जिला कलक्टर ने भी सभी विभागों को अपने स्तर पर तैयारी व इंतजाम रखने के निर्देश दिए हैं।
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