दुनिया का सबसे बड़ा उड़ान भरने वाला पक्षी लुप्त होने के कगार पर

तेजी से घटती सारस की संख्या पर पक्षी प्रेमियों में बढ़ी चिंता

दुनिया का सबसे बड़ा उड़ान भरने वाला पक्षी लुप्त होने के कगार पर
अब सारस की कम होती तादाद और सिमटते आवास पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गए।

क ोटा। उड़ान भरने वाला दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी सारस लुप्त होने की कगार पर खड़ा है। सारस पक्षियों का कुनबा दिनों-दिन घटता जा रहा है। दो दशक पहले तक कोटा संभाग में अपने कलरव से लोगों को आकर्षित करने वाले सारस अब चुनिंदा जलाशयों तक सिमट कर रह गए। जल स्रोतों पर अतिक्रमण, अवैध मतस्य आखेट, इंसानी दखल और कमजोर मानसून के चलते बदली परिस्थितियों से सारस के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए। गोड़ावण व गिद्धों पर पहले ही लुप्त होने का संकट गहरा रहा है, अब सारस की कम होती तादाद और सिमटते आवास पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गए। हालांकि, 25 साल बाद कोटा शहर में एक साथ एक ही जगह पर 50 से ज्यादा सारस नजर आए हैं। ऐसे में पक्षी प्रेमियों ने वन विभाग से इनके संरक्षण के लिए कार्य योजना बनाने की मांग उठाई है।

साल दर साल यूं घटी संख्या
जैदी ने बताया कि आलनिया में वर्ष 2000 से पहले 92 सारस को पूरे तालाब में देखा गया था। चम्बल के मानस गांव में पहले बीच में टापू था, जिस पर ककड़ी की खेती होती थी। उन्हीं के बीच और दूसरे किनारे पर वर्ष 2001 में 84 सारस को देखा था। उस समय वाइल्ड लाइफ देहरादून के डॉ. वीसी चौधरी भी मेरे साथ थे, जो सारस का झुंड देख खुशी जाहिर की थी लेकिन साल दर साल इनकी संख्या में तेजी से गिरावट होती गई।  

30 से 40 साल होती है उम्र
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सुरभि बतातीं हैं, पक्षियों में सारस की उम्र काफी लंबी होती है। यह पक्षी 30 से 40 साल तक जिंदा रहता है। 300 फीट ऊंचाई तक उड़ान भरता है। पानी में झाड़ियां या पेड़-पौधें के बीच घौंसला बनाते हैं, ताकि श्वान सहित अन्य जानवरों से बचा सके। 

5 सालों में नहीं बना एक भी घौंसला
हाड़ौती नेचुरल सोसाइटी के सदस्य पिछले 34 वर्षो से इस पक्षी पर अध्ययन कर रहे हंै। सूर सागर से उम्मेदगंज तक कम से कम 6 घोसले बनते थे, वहां पिछले 5 वर्षों में एक भी नहीं बना। वर्तमान में  वर्षा कम होने के कारण अधिकतर तालाब सुख गए। गामछ के आसपास के खेतों में अवैध पम्प चल रहे हैं। वर्ष 2001 में यहां 40 से अधिक सारस का जमावड़ा नजर आया था। क्योंकि, उस समय आलनिया बांध में पानी था और पेठा कास्त भी बहुत कम थी। लेकिन वर्तमान में जल दोहन के कारण तालाब ही सूख गए। प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए।

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वर्ष 2000 के बाद लगातार घटी संख्या
नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताते हैं, वर्ष 2000 के बाद सारस पक्षियों की संख्या में लगातार गिरावट आई है। पिछले 25 साल पहले कोटा के जलाशयों में जितने सारस दिखाई देते थे, उतने अब नहीं दिखते। पिछले 32 वर्षों से अध्ययन रहा हूं, पहले आसपास के जलाशयों में इनके मेले लगे होते थे। युवा सारस अपने लिए जोड़े बनाते, इनकी कोल और डांस देखने को मिलता था। लेकिन अब हर वेटलैंड पर अतिक्रमण, पानी की मोटरों से जल दोहन, अवैध मतत्य आखेट, इंसानी दखल के चलते इनका प्राकृतिक आवास नष्ट होने लगा है, जो इनकी घटती संख्या के लिए जिम्मेदार है।

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दो दशक बाद नजर आए 52 सारस
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सुरभि श्रीवास्तव कहतीं हैं, 25 साल बाद यह पहला मौका है, जब सारस एक ही जगह एक साथ 52 की संख्या में नजर आए। रंगपुर इलाके के खेतों में पिछले महीने देखा गया था। गंगाईचा गांव के पास चंबल नदी में इनका बसेरा है। यहा खेतों में सारस (क्रेन) की अठखेलियां पक्षी प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। सुबह जल्दी खेतों में ये दाना चुगने आते हैं और इसके बाद वापस गंगाईचा गांव स्थित चंबल नदी पर चले जाते है। यहां पर पर्याप्त भोजन-पानी की उपलब्धता और समृद्ध जैव विविधता सारस के अनुकूल है। इसलिए यहां सारस आते रहते हैं। अप्रैल से जून तक यही रहते हैं। पिछले कई सालों से सारस की संख्या कम होती जा रही है, जो चिंता का विषय है।

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प्राकृतिक आवास नष्ट होना ही सबसे बड़ा कारण
बर्ड्स रिसर्चर हर्षित शर्मा कहते हैं, सारस पर संकट के बादल छाने लगे हंै। सारस के रहवास इलाके, जलाशयों के पास मानवीय दखल, खेतों में कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल, अवैध खनन, अतिक्रमण, तालाबों में अवैध मतस्य आखेट से इनका प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। जिससे यह हालात बन रहे हैं। जबकि, यह किसानों का दोस्त होता है। कीड़े-मकोड़े खाकर फसलों को बचाता है। पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ का खमियाजा इंसानों के साथ जीव-जंतुओं पर भी देखा जा सकता है। खेतों में कीटनाशक का उपयोग, पानी की कमी और करंट के तार भी पक्षियों की मौत के कारण बन रहे हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए वेटलैंड को बचाना जरूरी है।

वन्यजीव विभाग की जहां भी वनभूमि है, वहां पक्षियों के लिए वेटलैंड विकसित किए जा रहे हैं। उम्मेदगंज पक्षी विहार में तो हम चावल की फसल भी करेंगे, ताकि सारस को भोजन की उपलब्धता हो सके। वहीं, अवैध गतिविधियों पर लगाम लगा दी गई है। यहां तालाब में पानी व मछलियां पर्याप्त होने से प्राकृतिक आवास डवलप हो रहा है। पक्षियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इनके संरक्षण के लिए सुरक्षित रहवास की कार्य योजना पर लगातार कार्य जारी है।
-अनुराग भटनागर, डीएफओ, वन्यजीव विभाग कोटा

संरक्षण के सुझाव
पक्षी प्रेमियों ने सारस के संरक्षण के लिए विभिन्न सुझाव दिए हैं। 
-वेटलैंड को अतिक्रमण से बचाएं।
-जिन इलाकों में आबादी वहां कंट्रेक्शन होने से रोका जाए।
-तालाबों में भू-जल दोहन के लिए लगी मोटरें बंद करवाई जाए।
-अवैध मतस्य आखेट, अवैध खनन, अवैध गतिविधियां रोकी जाए। 
-वन विभाग द्वारा वेटलैंड पर चावल, मक्का, ज्वार की फसल करें ताकि इन्हें आसानी से भोजन मिल सके।

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