एआई के दौर में बदली छात्रों की पसंद, सिविल इंजीनियरिंग ने दी कंप्यूटर साइंस को टक्कर

सुविवि के आईईटी में सीएस की सभी 120 सीटों पर प्रवेश प्रस्तावित

एआई के दौर में बदली छात्रों की पसंद, सिविल इंजीनियरिंग ने दी कंप्यूटर साइंस को टक्कर
शहर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कंप्यूटर साइंस अब भी छात्रों की पहली पसंद बनी हुई है, लेकिन इस वर्ष राजस्थान इंजीनियरिंग एडमिशन प्रोसेस की सीट आबंटन प्रक्रिया के पहले राउंड में नए नया रुझान सामने आया। सीएस के बाद सिविल इंजीनियरिंग ने एक बार अपनी लोकप्रियता बढ़ाई।

उदयपुर। शहर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कंप्यूटर साइंस अब भी छात्रों की पहली पसंद बनी हुई है, लेकिन इस वर्ष राजस्थान इंजीनियरिंग एडमिशन प्रोसेस (रीप) की सीट आबंटन प्रक्रिया के पहले राउंड में नए नया रुझान सामने आया है। सीएस के बाद सिविल इंजीनियरिंग ने एक बार अपनी लोकप्रियता बढ़ाई है। इसके चलते शहर के तमाम सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में सिविल इंजीनियरिंग की जमकर पूछ परख हो रही है। बता दें, आईईटी बॉम्बे और आईईटी दिल्ली में भी यह बदलाव देखने को मिला है। आईईटी बॉम्बे में इस वर्ष सिविल इंजीनियरिंग की ओपनिंग ऑल इंडिया रैंक 385 रही, जबकि पिछले वर्ष यह 2666 थी।

इसी तरह आईईटी दिल्ली में ओपनिंग रैंक 3030 से सुधरकर 179 पर पहुंच गई। निजी कॉलेज प्रबंधकों का भी मानना है कि एआई की आशंकाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर बूम के बीच यह बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते साल जिस रफ्तार से कंप्यूटर साइंस को लेकर दबदबा रहा था, उसे इस साल सिविल इंजीनियरिंग कोर्स जमकर चुनौती दे रहा है। उधर, सुखाड़िया विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग कॉलेज में भी रीप से पहला राउंड शुरू हुआ है। यहां कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग तथा इले्ट्रिरकल इंजीनियरिंग के कोर्स संचालित हो रहे हैं। इसमें सर्वाधिक 120 सीटें कंप्यूटर साइंस में है तो अन्य में 60-60 सीटें निर्धारित हैं।

 सिविल में रुझान का यह है बड़ा कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे केवल देश में तेजी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की वजह नहीं है, बल्कि व्यापक आर्थिक बदलाव और रोजगार की बदलती प्राथमिकताएं भी जिम्मेदार हैं। कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के कारण कई छात्र अब अपेक्षाकृत स्थिर कॅरियर देने वाली कोर इंजीनियरिंग शाखाओं की ओर रुख कर रहे हैं। एआई को लेकर बढ़ती आशंकाएं छात्रों को स्थिरता की तलाश में सिविल जैसी कोर इंजीनियरिंग शाखाओं की ओर तेजी से आकर्षित कर रही हैं।

अनिश्चित भविष्य का खतरा
इस बदलाव का अर्थ यह है कि जिन छात्रों के पास पहले इले्ट्रिरकल या मैकेनिकल इंजीनियरिंग चुनने का विकल्प होता था, उनमें से कई इस वर्ष सिविल इंजीनियरिंग को प्राथमिकता देने की तैयारी में है। इससे स्पष्ट है कि इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में बढ़ते अवसरों और एआई से जुड़े अनिश्चित भविष्य के बीच सिविल इंजीनियरिंग एक बार फिर आकर्षक कॅरियर विकल्प बनकर उभरी है।
फोटो-100 

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