बांध क्षेत्र से खुद हटाएं अतिक्रमण, नहीं तो सरकार वसूले खर्चा : राजस्थान हाईकोर्ट
कलेक्टर को कर सकते हैं शिकायत
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर के रामगढ़ बांध को अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर सख्ती दिखाई है। अदालत ने अतिक्रमियों को चेतावनी दी है कि वे एक पखवाड़े में अपने अतिक्रमणों को स्वयं हटा लें।
अदालत ने राज्य सरकार को कहा कि यदि इस अवधि में कब्जे नहीं हटाए जाए तो वह अपने स्तर पर कार्रवाई कर एरिया को अतिक्रमण मुक्त करें और उसमें होने वाला खर्चा संबंधित अतिक्रमी से वसूला जाए। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कोई व्यक्ति बाधा डालता है तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस चन्द्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश रामगढ़ बांध सहित प्रदेश के अन्य जल स्रोतों में अतिक्रमण से जुड़े मामले में लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि अतिक्रमियों के नामों को सार्वजनिक करते हुए अखबारों में प्रकाशित करे। इसके साथ ही आम सूचना भी प्रकाशित कराई जाए, ताकि अतिक्रमियों को इसकी जानकारी मिल सके। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों सहित सभी को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए कि रामगढ़ में कोई अतिक्रमण नहीं हो। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने रिपोर्ट पेश कर कर कहा कि विराटनगर तहसील में 351 अतिक्रमण में से 349 कब्जों को हटाया गया है।
शाहपुरा में 90 अतिक्रमण में से 84, जमवारामगढ़ में 522 में से 417 हटाए गए हैं। आंधी में 6 अतिक्रमण हटाए गए। इसी तरह आमेर तहसील में 81 अतिक्रमण चिह्नित कर 31 हटाए गए हैं। जेडीए की ओर से गत 10 से 12 अगस्त को इसके लिए विशेष अभियान चलाया गया था। इस दौरान निम्स विवि का अतिक्रमण भी सामने आया है।
एनिकट और अतिक्रमण पर कार्रवाई :
महाधिवक्ता ने बताया कि एनिकट हटाने के आदेश की पालना में गत 6 अगस्त कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में संबंधित अफसरों को तत्काल एनिकट हटाने को कहा गया है। बांध में सात पंप मिले हैं, लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा। जात सरकारी पंपों से 3,274 लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
न्याय मित्र ने रिपोर्ट पर जताई आपत्ति :
राज्य सरकार की रिपोर्ट पर न्यायमित्र डॉ. अभिनव शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जिन अतिक्रमणों को हटाने का हवाला दिया जा रहा है, उनमें कोई होटल, रिसोर्ट या पक्का निर्माण नहीं है। खेत से फसल हटाना, तारबंदी, खेत की मेड, छप्पर व झोंपड़ी को हटाकर अतिक्रमण हटाने की बात कही जा रही है। सरकार खेत में फसल काटकर उसे काश्तकार को ही दे देती है और मामूली जुर्माना वसूल लेती है। इसके अलावा बहाव क्षेत्र में रोड तक बना दी गई है। अदालत ने यह जानकारी सामने आने पर आश्चर्य जताया। इसके जवाब में एजी ने कहा कि रोड को अब हटा दिया गया है।
कलेक्टर को कर सकते हैं शिकायत :
अदालत ने कहा है कि मीडिया और पत्रकार कोर्ट के आंख और कान की तरह हैं। ऐसे में कोई भी पत्रकार या आमजन स्थानीय कलेक्टर को अतिक्रमण की शिकायत दे सकता है, उसका नाम गोपनीय रखा जाएगा। कलेक्टर शिकायत पर तुरंत जांच कर सही मिलने पर अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करे।

Comment List