क्या फिर होने वाली हैं जंग? अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच यूएई ने किए ईरान पर हवाई हमले, ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव

यूएई ने ईरानी रिफाइनरी को बनाया निशाना

क्या फिर होने वाली हैं जंग? अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच यूएई ने किए ईरान पर हवाई हमले, ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की वायु सेना ने अप्रैल में ईरान के लावान द्वीप पर स्थित तेल रिफाइनरी पर हमले किए थे। यह कार्रवाई अमेरिकी संघर्ष विराम के दौरान हुई। हालांकि यूएई ने चुप्पी साधी है, लेकिन उसने सैन्य बल के इस्तेमाल का अधिकार सुरक्षित रखा है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है।

वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के सक्रिय चरण के अंत तक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान पर हवाई हमले किए थे। यह दावा सोमवार को एक रिपोर्ट में किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, यूएई की वायु सेना ने अप्रैल की शुरुआत में हवाई हमलों की एक श्रृंखला को अंजाम दिया। यह ठीक उसी समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष विराम की घोषणा की थी। इन हमलों का निशाना फारस की खाड़ी में स्थित लावान द्वीप पर मौजूद एक रिफाइनरी थी।

उस समय, हालांकि न तो ईरान ने इन हवाई हमलों के पीछे किसका हाथ था, इसका खुलासा किया और न ही यूएई ने इसकी जिम्मेदारी ली लेकिन राष्ट्रीय ईरानी तेल शोधन और वितरण कंपनी ने आठ अप्रैल को कहा कि द्वीप पर मौजूद तेल रिफाइनिंग सुविधाओं पर "दुश्मन" द्वारा हमला हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया है कि खाड़ी देश के विदेश मंत्रालय ने इन कथित हमलों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मंत्रालय ने केवल इतना याद दिलाया कि यूएई के पास किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित है, जिसमें सैन्य बल का उपयोग भी शामिल है।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी इस पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, जबकि व्हाइट हाउस ने कहा कि ट्रंप के पास सभी विकल्प खुले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के भीतर स्थित ठिकानों पर हमले किए, जिससे काफी जान माल का नुकसान हुआ। सात अप्रैल को अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के संघर्ष विराम की घोषणा की। इसके बाद इस्लामाबाद में हुई बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला और अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी। बाद में, राष्ट्रपति ट्रंप ने संघर्ष विराम की अवधि को और बढ़ा दिया, ताकि ईरान को शांति प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। यह नाकेबंदी अभी भी जारी है।

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