पश्चिम एशिया संकट: रिपोर्ट में हुआ खुलासा; ईरान युद्ध लंबा चला तो महंगे हो सकते हैं मोबाइल फोन और कंप्यूटर, मेमोरी और चिपसेट की आपूर्ति भी प्रभावित
टेक अलर्ट: युद्ध से चिपसेट और मेमोरी की किल्लत, महंगे होंगे मोबाइल
नोकिया इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट से चिपसेट और मेमोरी की सप्लाई चेन बाधित हो गई है। वर्तमान में स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन युद्ध खिंचने पर स्मार्टफोन और कंप्यूटर के दाम बढ़ सकते हैं। भारत में 5G FWA के कारण डेटा खपत 31.1 GB प्रति यूजर पहुंच गई है, जिससे स्पेक्ट्रम आवंटन में बदलाव की जरूरत है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण मेमोरी और चिपसेट की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने लगी है और युद्ध लंबा चलने की स्थिति में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और हर उस डिवास के दाम बढ़ सकते हैं, जिनमें इनका इस्तेमाल होता है। भारत में नोकिया इंडिया की प्रबंधक विभा मेहरा ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी करने के बाद संवाददाताओं के प्रश्नों के उत्तर में बताया कि युद्ध के कारण दूसरी चीजों के साथ मेमोरी और चिपसेट की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। अभी डिवाइसों की आपूर्ति को लेकर कोई समस्या नहीं है, क्योंकि पर्याप्त इनवेंटरी उपलब्ध है, लेकिन युद्ध जारी रहा तो मध्यम अवधि (छह महीने से दो साल) में असर दिखने लगेगा।
उन्होंने कहा कि फिलहाल मेमोरी और चिपसेट के दाम बढ़ने लगे हैं। कुछ लोगों ने इनका भंडारण शुरू कर दिया है और दाम बढ़ा दिये हैं। ऐसे में तुरंत नहीं तो आने वाले कुछ समय में इसका असर जरूर दिखेगा। इंडिया मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स 2026 जारी करते हुए मेहरा ने कहा कि भारत में डाटा उपभोग तेजी से बढ़ रहा है। पिछले पांच साल में 21.7 प्रतिशत की औसत दर से बढ़ता हुआ कुल डाटा ट्रैफिक साल 2025 में 27.6 एग्जाबाइट मासिक पर पहुंच गया। वहीं प्रति यूजर औसत मासिक डाटा खपत 18.2 प्रतिशत की औसत वृद्धि के साथ पिछले साल 31.1 जीबी पर रहा।
उन्होंने बताया कि इस वृद्धि में 5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए)का सबसे बड़ा योगदान रहा। कुल 5जी डाटा उपभोग में इसकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से अधिक रही। मोबाइल डाटा यूजरों की तुलना में एफडब्ल्यूए यूजरों ने 10 गुना डाटा की खपत की। साल दर साल 5जी एफडब्ल्यूए यूजरों की संख्या में दुगुनी हो गयी है। मेहरा ने बताया कि एक बड़ा बदलाव अपलोड और डाउनलोड के अनुपात में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अपलोड तेजी से बढ़ रहा है। इसके लिए दूरसंचार कंपनियों को अपने स्पेक्ट्रम आवंटन में बदलाव करना होगा। साथ ही उन्होंने डिवाइसों समेत उन तकनीकों पर भी काम करना होगा जिससे डाटा अपलोड ज्यादा सहज हो सके।
उन्होंने बताया कि फिलहाल, औसतन 90 प्रतिशत स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल डाउनलोड के लिए और 10 प्रतिशत का अपलोड के लिए किया जा रहा है। यह आवंटन यूजरों के पारंपरिक इस्तेमाल के पैटर्न के आधार पर किया गया है। हालांकि बदलते पैटर्न के अनुरूप उन्हें अपलोड स्पीड बढ़ानी होगी, लेकिन डाउनलोड से समझौता किये बिना। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2025 के अंत में देश में कुल 89.2 करोड़ सक्रिय 4जी डिवाइस हैं जिनमें से 38.3 करोड़ 5जी के लिए सक्षम हैं यानी नेटवर्क उपलब्ध रहने पर उन पर 5जी का की सुविधा मिल सकती है। देश में बेचे गये हर 10 में से नौ स्मार्टफोन 5जी वाले थे।

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