43 साल बाद पाली विस सीट पर जीती कांग्रेस, पारख को हराया

टैक्सटाइल उद्योग की नगरी में 1980 में अंतिम बार जीती थी कांग्रेस

43 साल बाद पाली विस सीट पर जीती कांग्रेस, पारख को हराया

कांग्रेस पिछले 43 सालों से पाली की विधानसभा सीट जीतकर खाता खोलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उसे कामयाबी इस बार मिली है।

ब्यूरो/नवज्योति, जयपुर। पाली विधानसभा सीट को जीतने के लिए कांग्रेस को 43 साल लग गए। इस बार यहां से कांग्रेस के भीमराज भाटी ने भाजपा के ज्ञानचंद पारख को हरा कर यह रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया है। इससे पहले कांग्रेस प्रत्याशी ने इस टैक्सटाइल उद्योग नगरी में वर्ष 1980 में अंतिम बार जीत दर्ज कराई थी। पाली जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। यह क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है। पाली जिले की कई विधानसभा सीटें परंपरागत रूप से भाजपा के खाते में ही आती रही हैं। पाली विधानसभा सीट पर लगातार पिछले पांच विधानसभा चुनाव भाजपा के ज्ञानचंद पारख जीत रहे हैं। कांग्रेस पिछले 43 सालों से पाली की विधानसभा सीट जीतकर खाता खोलने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उसे कामयाबी इस बार मिली है। इस सीट पर 43 साल पहले 1980 में कांग्रेस के अंतिम विधायक माणक मेहता चुने गए थे। विधानसभा चुनाव 1985 और 1990 में भाजपा से पुष्पा जैन विधायक निर्वाचित हुई थी। इसके बाद 1993 में भीमराज भाटी निर्दलीय उम्मीदवार निर्वाचित हुए थे। वर्ष 1998 से लगाकर लगातार पांचवीं बार भाजपा के विधायक ज्ञानचंद पारख पाली विधानसभा से जीतते आ रहे हैं। पाली में वर्ष 2018 के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी महावीर सिंह सुकरलाई तीसरे नंबर पर रहे थे। 

अब तक पाली से चुने गए विधायक
यहां से वर्ष 1957 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मूलचंद, 1962 में केसरी सिंह निर्दलीय, 1967 में एम. चंद, वर्ष 1972 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शंकर लाल, 1977 में  मूलचंद डागा और 1980 माणक लाल मेहता जीते थे। वर्ष 1985 और 1990 में  भाजपा की पुष्पा जैन और 1993 में निर्दलीय भीम राज भाटी चुने गए थे। 

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