सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष में लगा ताला

महिलाओं को सोनोग्राफी मशीन आने के बाद भी उपचार के लिए जाना पड़ रहा कोटा, युवाओं के आंदोलन के बाद सीएचसी को मिली थी 16 लाख रुपए की मशीन

सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष में लगा ताला

सुल्तानपुर नगर के अस्पताल में करीब ढाई माह पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 16 लाख रुपए लागत की सोनोग्राफी मशीन लगवा दी गई थी। लेकिन आज भी महिलाओं को उपचार कराने के लिए 40 किलोमीटर दूर कोटा शहर जाना पड़ रहा है। सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष पर ताला लगा हुआ है।

सुल्तानपुर। सुल्तानपुर नगर के अस्पताल में करीब ढाई माह पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा 16 लाख रुपए लागत की सोनोग्राफी मशीन लगवा दी गई थी। लेकिन आज भी महिलाओं को उपचार कराने के लिए 40 किलोमीटर दूर कोटा शहर जाना पड़ रहा है। ब्लॉक क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल मेडिकल कॉलेज कोटा के अधीन आने वाली सीएचसी सोनोग्राफी मशीन को लगाए हुए ढाई माह से अधिक समय हो गया है। लेकिन आम जनता को अभी तक सोनोग्राफी की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। सोनोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी कक्ष पर ताला लगा हुआ है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब दो दर्जन मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें सोनोग्राफी की आवश्यकता होती है। उन्हें कोटा या फिर निजी अस्पतालों में जा कर के अपना उपचार कराना पड़ता है। चिकित्सालय प्रशासन द्वारा इस मामले में कई बार उच्चाधिकारियों को सोनोलॉजिस्ट लगवाने के लिए अवगत करा दिया गया है। लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। गंभीर हालत में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं को भी बिना सोनोग्राफी जांच के ही 40 किलोमीटर दूर कोटा जाना मजबूरी बन गया है।

लंबे संघर्ष के बाद मिली थी सोनोग्राफी मशीन
सोनोग्राफी मशीन की सुविधा को लेकर युवा शक्ति द्वारा आंदोलन चलाया गया था। जिसमें युवाओं के साथ ही कस्बे वासियों एवं महिलाओं ने भी आंदोलन को सफल बनाने के लिए योगदान दिया था। जिसके फलस्वरूप लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के द्वारा ग्रामीणों की मांग पर एवं नगर के लोगों की मांग पर सोनोग्राफी मशीन की घोषणा कर सीएचसी में मशीन उपलब्ध करवाई थी। लेकिन ढाई माह बाद भी इसे नियमित रूप से शुरू नहीं कराया जा सका है।

धूल खा रही 16 लाख से अधिक की मशीन
स्थिति यह है कि 16 लाख से अधिक राशि की यह मशीन धूल खा रही है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि विभाग के पास सोनोलॉजिस्ट नहीं है। लेकिन सोनोलॉजिस्ट लगाने के लिए जनप्रतिनिधियों का भी कोई ध्यान नहीं है। जबकि सीएचसी मेडिकल कॉलेज कोटा के अधीन आता है जहां प्रशासन और जनप्रतिनिधि चाहे तो प्रतिनियुक्ति पर ही सोनोलॉजिस्ट लगा कर के नगर वासियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को राहत पहुंचा सकते हैं।

रात्रि में नहीं मिलती महिला चिकित्सक
तहसील क्षेत्र की सबसे बड़ी सीएचसी में स्थानीय चिकित्सकों द्वारा मरीजों को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जहां चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर आॅपी सामर के आने के बाद चिकित्सालय में सुविधा विस्तार भी हुआ है तो वहीं यहां कार्यरत डॉ मोहम्मद परवेज डॉ श्याम मालव डॉ दिनेश मीणा आदि द्वारा चिकित्सालय में बेहतरीन उपचार भी दिया जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी कमी यह है कि यहां महिला रोगियों को चिकित्सालय में रात्रि के समय कोई महिला चिकित्सक नहीं मिलती। दिन में भी कभी-कभी ही महिला चिकित्सक का उपचार मिल पाता है। ऐसे में क्षेत्र के बाशिंदों की पीड़ा यह है कि यदि कोई महिला गंभीर बीमार हो जाए तो उपचार तक के लिए यहां आस-पास कोई डॉक्टर तक नहीं मिलता। ऐसे में कोटा जाना महिलाओं की मजबूरी बन गई है।

इनका कहना है
सोनोलॉजिस्ट की समस्या का शीघ्र ही समाधान किया जाएगा। साथ ही महिला चिकित्सक रात्रि में नहीं रुकने की शिकायत के लिए भी संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर समाधान कराया जाएगा।
-रामनारायण मीणा, विधायक

सुल्तानपुर चिकित्सालय में मरीजों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। साथ ही मरीजों को निशुल्क दवाइयां देकर के उपचार किया जा रहा है। सोनोलॉजिस्ट के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया हुआ है। साथ ही महिला चिकित्सक के लिए भी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिख दिया है।
-डॉक्टर ओपी शर्मा, सीएचसी प्रभारी 

सीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं होने की शिकायतें मिली हैं। सीएचसी प्रभारी को कार्यवाही करनी चाहिए। सोनोग्राफी मशीन चलाने के लिए भी पत्र लिखा हुआ है।
-डॉ गिरिराज मीणा, बीसीएमओ

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