आईटी में नवीन अनुसंधान और टेक्नीकल एजुकेशन पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी 

विश्वविद्यालय ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया

आईटी में नवीन अनुसंधान और टेक्नीकल एजुकेशन पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी 

उद्घाटन सत्र का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं विश्वविद्यालय कुलगीत से किया गया, तत्पश्चात् प्रो. अल्पना कटेजा ने विधायक कालीचरण सर्राफ का शॉल तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।

जयपुर। आरए पोद्दार इन्स्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेन्ट, राजस्थान विश्वविद्यालय के सभागार में सतत विकास के लिए वाणिज्य, प्रबंधन और आईटी में नवीन अनुसंधान और अभ्यास विषय पर लेखा एवं सांख्यिकी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय एवं तिरूपति कॉलेज ऑफ टेक्नीकल एजुकेशन, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि कालीचरण सराफ विधायक, मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र, विशिष्ट अतिथि डॉ. डीपी शर्मा, एम्बेसेडर, स्वच्छ भारत अभियान, प्रो. एम.एल. छीपा पूर्व कुलपति अजमेर एवं भोपाल विश्वविद्यालय, प्रो. आर. के. गुप्ता, कुलपति अग्रसेन विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश, प्रो. अप्पाराव, अध्यक्ष, इण्डियन एकाउटिंग एसोसिएशन, प्रो. आर.एल. गोदारा कुलपति, जेपीआर विश्वविद्यालय, चेन्नई, एवं डॉ. प्रियंका गोयल, निदेशक, तिरूपति कॉलेज ऑफ टेक्नीकल एजुकेशन रहे। इस अवसर पर समारोह की अध्यक्षा प्रो. अल्पना कटेजा, कुलपति, राजस्थान विश्वविद्यालय, एवं संगोष्ठी अध्यक्ष प्रो. अशोक अग्रवाल, डीन, पी.जी. स्कूल ऑफ कॉमर्स, राजस्थान विश्वविद्यालय ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया।

उद्घाटन सत्र का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं विश्वविद्यालय कुलगीत से किया गया, तत्पश्चात् प्रो. अल्पना कटेजा ने विधायक कालीचरण सर्राफ का शॉल तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। इसके पश्चात् प्रो. अशोक अग्रवाल ने डॉ. डी.पी. शर्मा को शॉल तथा प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। इसी सत्र में अन्य सम्माननीय अतिथियों का भी स्वागत किया गया। इस उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

उद्घाटन सत्र के प्रारंभ में संगोष्ठी अध्यक्ष प्रो. अशोक अग्रवाल ने उपस्थित सभी विद्वतजनो एवं संगोष्ठी में पधारे विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कालीचरण सर्राफ ने बताया कि देश के सतत विकास हेतु वाणिज्य, प्रबंधन तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार के माध्यम से समग्र विकास संभव है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि सतत विकास ही संतुलित विकास का आधार है एवं सतत विकास सभी के सहयोग से ही संभव है किंतु समग्र विकास हेतु महिला विकास अनिवार्य है इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, छात्र आत्महत्या, आर्थिक विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण प्रदूषण जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी ध्यानाकर्षण किया।

इस अवसर पर बोलते हुए भोपाल हिन्दी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एम.एल. छीपा ने प्रौद्योगिकी के सकारात्मक एवं उचित उपयोग की बात कही। इसके अतिरिक्त प्रो. आर. एल. गोदारा ने प्रौद्योगिकी विकास के साथ-साथ अनुपयोगी मोबाइल, चार्जर, कम्प्यूटर आदि जैसे उपकरणों के उचित प्रबंधन की बात कही। इस अवसर पर उन्होंने जल प्रदूषण तथा प्राकृतिक आपदाओं हेतु संतुलित विकास पर बल दिया तथा कहा कि पंचतत्वों को संतुलित करने से ही हमारा समग्र विकास संभव है।

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उद्घाटन सत्र पर बोलते हुए उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद के वरिष्ठ प्रोफेसर अप्पाराव ने कहा कि सतत विकास के लिए भारत ने दुनियां की आँखे खोली है। इसके अतिरिक्त डॉ. प्रियंका गोयल, निदेशक, तिरूपति कॉलेज ऑफ टेक्नीकल एजुकेशन ने वाणिज्य, प्रबंधन तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवीन शोध को बढावा देकर विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने की बात कही।

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उ‌द्घाटन सत्र की अध्यक्षा प्रो. अल्पना कटेजा, कुलपति, राजस्थान विश्वविद्यालय ने इस अवसर पर कहा कि शोध एवं नवाचार किसी भी देश के आर्थिक विकास की मजबूत कड़ी होती है तथा आज के उपभोक्तावादी युग में वाणिज्य तथा प्रबंधन इसमें सहायक होते है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ऐसी संगोष्ठियां नये विचारों को प्रस्फुटित करने में अपनी महती भूमिका अदा करती है। उद्घाटन सत्र के अंत में संगोष्ठी संयोजिका राजस्थान विश्वविद्यालय के कम्प्यूटर विभाग की निदेशक प्रो. कृष्णा गुप्ता ने उपस्थित सभी विद्वतजनों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
 इस दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिन सतत विकास के लिए वाणिज्य, प्रबंधन और आईटी में नवीन अनुसंधान और अभ्यास विषय पर दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। इन तकनीकी सत्रों में देश-विदेश से आये विभिन्न प्रतिभागियों ने 60 से भी अधिक शोधपत्रों का वाचन किया। इस दो दिवसीय संगोष्ठी में देश-विदेश के लगभग 500 से भी अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे है। संगोष्ठी के दोनों तकनीकी सत्रों में अनेक विदेशी प्रतिभागियों ने वर्चुअल माध्यम से अपने शोधपत्रों का वाचन किया।

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