धरती पर खतरे की घंटी! अंतरिक्ष में खड़ा हो रहा ‘कूड़े का पहाड़’

9,600 टन से अधिक कचरा अंतरिक्ष में मौजूद

धरती पर खतरे की घंटी! अंतरिक्ष में खड़ा हो रहा ‘कूड़े का पहाड़’

कुछ नहीं किया तो मलबे से ‘बेकार’ हो जाएगा स्पेस

वॉशिंगटन। बात है 1978 की नासा के वैज्ञानिक डोनाल्ड केसलर ने अंतरिक्ष के ‘कबाड़खाने’ में तब्दील होने की चेतावनी दी। उनकी इस थ्योरी को ‘केसलर सिन्ड्रोम’ के नाम से जाना गया जिसके मुताबिक पृथ्वी की कक्षा में मौजूद कचरा एक ऐसे बिंदु पर पहुंच जाएगा जहां यह और अधिक मात्रा में खगोलीय मलबा पैदा करेगा जो सक्रिय सैटेलाइट्स, ऐस्ट्रोनॉट्स और मिशन प्लानर्स के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। इंसान को अंतरिक्ष में पहला कदम रखे 50 साल से अधिक समय हो गया है। अब वैज्ञानिकों की नजर मंगल जैसे ग्रह पर है जो कभी एक सपना हुआ करता था।  कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में लोगों को कई उल्कापिंड की आतिशबाजी दिखाई पड़ी थी। इस रहस्यमय रोशनी को लेकर खगोलविद जोनाथन मैकडॉवेल ने कहा कि यह दरअसल चीनी रॉकेट का मलबा था जो पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश कर रहा था। इसी तरह का मलबा बड़ी मात्रा में हमारी पृथ्वी की कक्षा में मौजूद है। अक्सर इसी मलबे के टुकडेÞ धरती पर जलते हुए गिरते हैं जो कई बार रिहायशी इलाकों में गिरने पर भारी नुकसान पहुंचाते हैं।

कुछ नहीं किया तो मलबे से ‘बेकार’ हो जाएगा स्पेस
हर सैटेलाइट एक दिन बन सकती है मलबा
यह मलबा इसलिए खतरनाक है कि क्योंकि यह 25,265 किमी/घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की निचली कक्षा में चक्कर लगाता है। यह रफ्तार किसी भी बड़े धमाके को अंजाम देने के लिए काफी है। एक्सपर्ट कहते हैं हर सैटेलाइट जो आॅर्बिट में प्रवेश करती है उसके खगोलीय मलबा बनने की संभावना होती है। एलन मस्क के स्टारलिंक जैसे प्रोजेक्ट अंतरिक्ष के मलबे को कई गुना बढ़ा सकते हैं। अमेरिकी सरकार के मुताबिक सॉफ्टबॉल से बड़े मलबे के लगभग 23,000 टुकड़े पृथ्वी के चक्कर लगा रहे हैं। 1 सेमी से बड़े मलबे के 5 लाख टुकड़े हैं और करीब 1 मिमी या उससे बड़े मलबे के 100 मिलियन टुकड़े ऑर्बिट में मौजूद हैं।

9,600 टन से अधिक कचरा अंतरिक्ष में मौजूद
आईएसएस के पास मौजूद मलबे के टुकड़े दिन में 15-16 बार धरती का चक्कर लगाते हैं जिससे टकराव का खतरा बढ़ जाता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) का अनुमान है कि पृथ्वी की कक्षा में सभी अंतरिक्ष पिंडों का कुल द्रव्यमान 9,600 टन से अधिक है। नासा का कहना है कि कक्षा में 600 किमी से कम ऊंचाई पर मौजूद मलबा कुछ साल में धरती पर वापस गिरेगा। लेकिन 1000 किमी से ज्यादा की ऊंचाई पर मौजूद कचरा करीब एक शताब्दी या उससे अधिक समय पर पृथ्वी के चक्कर लगाता रहेगा। देवेसॉफ्ट की 1 सितंबर 2021 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी की कक्षा में कुल 4550 सैटेलाइट्स मौजूद हैं। इसमें 3790 सैटेलाइट्स निचली कक्षा में मौजूद हैं।

किस देश की कितनी सैटेलाइट्स
देशों की 50 अलग-अलग ऑपरेटर्स या स्पेस एजेंसियां संचालित करती हैं। अंतरिक्ष में सबसे अधिक सैटेलाइट्स एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की हैं (1655)। इसके अलावा चीन के रक्षा मंत्रालय की 129, रूसी रक्षा मंत्रालय की 125, नासा की 60, इसरो की 47 और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की 45 सैटेलाइट ऑर्बिट में मौजूद हैं। देशवार देखें तो अमेरिका की सबसे अधिक 2804, चीन की 467, ब्रिटेन की 349, रूस की 168, जापान की 93 और भारत की 61 सैटेलाइट अंतरिक्ष ऑर्बिट में चक्कर लगा रही हैं।

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