"वीबी जी राम जी" योजना से ग्रामीणों को 125 दिन का रोजगार: अरुण साव
जी राम जी योजना: ग्रामीणों को 125 दिन का रोजगार
छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने 'विकसित भारत जी राम जी' (VB-G RAM G) योजना की सराहना करते हुए कहा कि अब ग्रामीणों को 100 के बजाय 125 दिनों का रोजगार मिलेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा है कि विकसित भारत जी राम जी योजना से ग्रामीणों को 125 दिनों का रोजगार मिलेगा जो आम जनता के लिए अधिक उपयोगी और प्रभावी साबित होगा। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने नवा रायपुर स्थित अटल निवास कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जब भी देश में कोई बड़ा सुधार या राष्ट्रहित का निर्णय लिया जाता है, कांग्रेस को तकलीफ होने लगती है। मोदी सरकार द्वारा लाई गई इस योजना के तहत ग्रामीणों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार मिलेगा, जो आम जनता के लिए अधिक उपयोगी और प्रभावी साबित होगा। इसी कारण कांग्रेस के पेट में दर्द हो रहा है।
अरुण साव ने कहा कि यह योजना पूर्णत: राष्ट्रहित और जनहित में है, जिससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है, लेकिन कांग्रेस हर सकारात्मक पहल का विरोध करती है।
उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री द्वारा दुर्ग में चल रही हनुमंत कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि आज कांग्रेस पार्टी घोषित रूप से सनातन विरोधी हो चुकी है। जिस तरह से बड़ी संख्या में लोग कथा सुनने आ रहे हैं और श्रद्धा, आस्था व सम्मान का वातावरण बन रहा है, उससे कांग्रेसी नेता घबराए हुए हैं। डर और हताशा में वे अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि साधु-संत और महात्मा धर्म की चर्चा और प्रचार के लिए आते हैं, लेकिन कांग्रेस नहीं चाहती कि सनातन मजबूत हो और सनातनियों में एकता आए। रायगढ़ की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में किसका हाथ है, इसकी जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। कानून हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है। सभी को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है।
उन्होंने कर्मचारियों के आंदोलन पर कहा कि राज्य सरकार लगातार कर्मचारियों के हित में कार्य कर रही है। समय-समय पर उनकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है और नई भर्तियां भी हो रही हैं। कर्मचारी हित से जुड़े कार्य निरंतर जारी हैं, इसलिए आंदोलन के बजाय संवाद और बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

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