कांग्रेस शुरू करेगी मनरेगा बचाओ अभियान : 45 दिनों तक चलेगा राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन, केसी वेणुगोपाल ने कहा- श्रमिकों का हक छीनता है नया अधिनियम
अधिकार आधारित रोजगार पर प्रहार करता है नया कानून
मनरेगा की जगह नया कानून लाकर सरकार का मकसद रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना को खत्म करना है। इसलिए कांग्रेस कार्यसमिति ने पूरे देश में 'मनरेगा बचाओ' अभियान शुरू करने का फैसला किया है।
नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी आगामी आठ जनवरी से देशभर में 'मनरेगा बचाओ' अभियान शुरू करेगी। यह राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन 45 दिनों तक चलेगा और इसके तहत कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यहां पार्टी मुख्यालय में शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में इसका ऐलान करते हुए कहा कि मनरेगा की जगह लाया गया नया अधिनियम श्रमिकों के हकों को छीनता है। यह नया कानून अधिकार आधारित रोजगार पर प्रहार करता है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मनरेगा की जगह नया कानून लाकर सरकार का मकसद रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना को खत्म करना है। इसलिए कांग्रेस कार्यसमिति ने पूरे देश में 'मनरेगा बचाओ' अभियान शुरू करने का फैसला किया है।
कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि 8 जनवरी से सभी राज्यों में बड़ी बैठकें की जायेंगी, जिनमें प्रदेश के सारे बड़े नेता और प्रभारी मौजूद रहेंगे। इन बैठकों में सभी जिलों को कुछ दायित्व दिए जायेंगे। इसके बाद 10 जनवरी को सभी जिलों में संवाददाता सम्मेलन करके पंचायती राज को खत्म करने की साजिश को उजागर किया जाएगा। सभी जिलों में 11 जनवरी को महात्मा गांधी या बाबा साहब भीमराव आम्बेडकर की प्रतिमा के सामने एक दिन का उपवास किया जाएगा और 12 जनवरी से 29 जनवरी तक हर पंचायत में चौपाल लगाई जायेगी। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तरफ से सभी ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा जाएगा। वार्ड और ब्लॉक स्तर पर 30 जनवरी को कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। इसके बाद 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरना दिया जाएगा। विधानसभा और राजभवन का घेराव कार्यक्रम 7 से 15 फरवरी के बीच किया जाएगा। इसमें सभी जनप्रतिनिधि शामिल होंगे। पार्टी 16 फरवरी से 25 फरवरी के बीच बड़ी रैलियां भी करेगी। उन्होंने मनरेगा को ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार की अहम व्यवस्था बताते हुए कहा है कि इसकी जगह लाया गया वीबी-जी राम जी अधिनियम ग्रामीण श्रमिकों के साथ धोखा है इसलिए सरकार को तत्काल मनरेगा को उसके मूलरूप में बहाल करना चाहिए।
वेणुगोपाल ने कहा कि मनरेगा देश की सबसे बेहतरीन मांग आधारित गरीबी उन्मूलन योजनाओं में से एक है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस योजना को खूब प्रसिद्धि मिली है। उन्होंने कहा कि हर साल, 5-6 करोड़ ग्रामीण परिवार मनरेगा के तहत अपने गांवों में काम करते हैं। संकट के समय में, यह योजना गरीबों के लिए सबसे मजबूत सहारा बन जाती है, लेकिन वीबी-जी रामजी के तहत रोजगार अब अधिकार नहीं रह गया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इसके तहत काम केवल केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित पंचायतों में ही उपलब्ध कराया जाएगा और यदि किसी पंचायत का चयन नहीं होता है, तो वहां लोगों को गरीबी या संकट की स्थिति में भी काम का अधिकार नहीं होगा। उनका कहना था कि यह सरकार की चुपचाप काम के कानूनी अधिकार को समाप्त करने की साजिश है, क्योंकि इससे कम वेतन और वेतन में कटौती का रास्ता खुल जाता है, जिससे श्रमिक और भी गरीबी में धकेल दिए जाते हैं। उन्होंने योजना के नाम से महात्मा गांधी के नाम हटाने को अत्यंत निंदनीय कृत्य करार दिया और कहा कि महात्मा गांधी महज एक प्रतीक नहीं हैं। उनका नाम हटाना मनरेगा में निहित अधिकार आधारित उनके दृष्टिकोण को मिटाने का प्रयास है।

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