मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय: सोनोग्राफी मशीन पर जमी धूल, काफी समय से खराब होने से नहीं हो रहा उपयोग
जानवरों के उपचार में आती है दिक्कत
पशु चिकित्सालय में रोज 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं।
कोटा। शहर के मोखापाड़ा स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन काफी समय से बंद पड़ी हुई है। आधुनिक जांच सुविधा के अभाव में चिकित्सकों को बीमार पशुओं का उपचार केवल लक्षणों और अनुभव के आधार पर करना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि कई जटिल मामलों में पशुओं की जान पर भी जोखिम बढ़ गया है। पशु चिकित्सालय में रोजाना 80 से 100 तक पशु उपचार के लिए लाए जाते हैं। इनमें बड़ी संख्या दुधारू गाय-भैंसों, गर्भवती पशुओं और प्रजनन संबंधी समस्याओं वाले मामलों की होती है। सोनोग्राफी मशीन के जरिए गर्भ की स्थिति, भ्रूण का विकास, आंतरिक सूजन, ट्यूमर, चोट या संक्रमण की सटीक जानकारी मिलती है। सोनोग्राफी मशीन बंद होने से गर्भ जांच पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
निजी जांच केंद्रों का ही सहारा
सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं मिलने से पशुपालकों को निजी क्लीनिकों और जांच केंद्रों की ओर रुख करना पड़ रहा है। निजी स्तर पर सोनोग्राफी कराने पर 800 से 1500 रुपऐ तक खर्च आ रहा है, जो छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बड़ी रकम है। कई पशुपालक आर्थिक तंगी के कारण जांच नहीं करा पा रहे हैं, जिससे बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आ रही। चिकित्सकों के अनुसार सोनोग्राफी के बिना कई बार बीमारी की सही वजह स्पष्ट नहीं हो पाती। इससे इलाज ट्रायल-बेस पर करना पड़ता है, दवाइयों की अवधि बढ़ जाती है और पशु के स्वस्थ होने में अधिक समय लगता है। दुधारू पशुओं के मामलों में दूध उत्पादन घटने से पशुपालकों को सीधा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
नई मशीन की मांग, लेकिन अब तक इंतजार
पशु चिकित्सालय प्रशासन की ओर से कई माह पहले ही नई सोनोग्राफी मशीन की मांग उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। बजट और प्रक्रिया का हवाला देते हुए मामला लंबित बताया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि आधुनिक मशीन मिलने से न सिर्फ जांच सटीक होगी, बल्कि रेफर के मामलों में भी कमी आएगी। स्थानीय पशुपालकों ने विभाग से मांग की है कि मोखापाड़ा पशु चिकित्सालय में जल्द से जल्द नई सोनोग्राफी मशीन उपलब्ध कराई जाए। ताकि क्षेत्र के हजारों पशुपालकों को राहत मिल सके और पशुओं का समय पर, सटीक और प्रभावी उपचार सुनिश्चित हो सके।
सरकारी अस्पताल में सोनोग्राफी सुविधा नहीं होने से हमें निजी जगह जांच करानी पड़ती है। खर्च ज्यादा आता है, ऊपर से समय भी बर्बाद होता है। गरीब पशुपालकों के लिए यह बड़ी समस्या है।
-रामलाल, पशुपालक
पशु चिकित्सालय में सोनोग्राफी मशीन खराब पड़ी हुई है। नई मशीन के लिए डिमांड भेज रखी है। नई मशीन मिलने के बाद उपचार की गुणवत्ता काफी बेहतर हो सकेगी।
-डॉ. भंवर सिंह, उपनिदेशक, राजकीय पशु चिकित्सालय

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