AAP का BJP पर हल्लाबोल: नफरत की भाषा और आपत्तिजनक वीडियो की शुरुआत केंद्र ने की, संजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण से जुड़े जमीनी मामलों पर उठाए सवाल
रोजगार और पेपर लीक के मुद्दों पर आंदोलन जारी रखने का ऐलान
चंदौली। आम आदमी पार्टी (आप) के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मंगलवार को भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो और नफरत की भाषा की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी की ओर से हुई। सिंह मंगलवार को पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन पहुंचे, जहां जिलाध्यक्ष अशोक सिंह के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर अभिनंदन किया।
स्टेशन पर पत्रकारों से बातचीत में सिंह ने भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो विवाद को लेकर आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को थप्पड़ मारते हुए दिखाया गया एक वीडियो प्रसारित किया गया था और विवाद बढ़ने के बाद भाजपा को वह वीडियो हटाना पड़ा। राम मंदिर निर्माण से जुड़े जमीन के मामलों पर सवाल उठाते हुए आप सांसद ने कहा कि उनके पास जमीन से संबंधित 13 दस्तावेज हैं। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग दस्तावेजों में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और भाजपा के पूर्व मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के हस्ताक्षर अथवा गवाही का उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसे तय किया जाना चाहिए। संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में रोजगार और सामाजिक न्याय के मुद्दों को लेकर आम आदमी पार्टी लगातार आंदोलन कर रही है। उन्होंने बताया कि रोजगार के सवाल पर पांच चरणों में पदयात्राएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि तीन चरण अभी बाकी हैं। पेपर लीक के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी युवाओं की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के नाम पर मिले चंदे से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उन्होंने वर्ष 2021 में उठाया था और आप आगे भी जनता तथा युवाओं से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी। आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की भूमिका और सीटों को लेकर पूछे गए सवाल पर सिंह ने कहा कि पार्टी प्रदेश में किस रूप में और कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

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