सरकारी बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की कमी : वाहनों का ईंधन खर्च बेलगाम, 4 साल में पेट्रोल-डीजल पर फूंके 92 करोड़
वाहन बेड़े में इलेक्ट्रिक की हिस्सेदारी बेहद कम
जयपुर। सरकारी वाहनों के संचालन में पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सरकारी कवायद के बीच राजस्थान के सरकारी वाहन बेड़े की तस्वीर अलग ही कहानी बयां कर रही है। राज्य के मोटर गैराज विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक चार साल में सरकारी वाहनों के पेट्रोल-डीजल पर 92.14 करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं। इनमें पेट्रोल पर करीब 47.79 करोड़ और डीजल पर करीब 40.35 करोड़ रुपए खर्च किए गए।
वाहन बेड़े में इलेक्ट्रिक की हिस्सेदारी बेहद कम
मोटर गैराज विभाग के नियंत्रण, निरीक्षण अथवा संचालन में कुल 286 वाहन हैं। इनमें 178 पेट्रोल, 71 डीजल और महज 17 इलेक्ट्रिक वाहन शामिल हैं। यानी कुल सरकारी वाहन बेड़े में करीब 94 फीसदी वाहन अभी भी पारंपरिक ईंधन पर निर्भर हैं। सीएनजी श्रेणी का एक भी वाहन दर्ज नहीं है।
खर्च के साथ बदलता दिखा ईंधन का ट्रेंड
शुरुआती वर्ष में डीजल वाहनों पर खर्च पेट्रोल की तुलना में काफी अधिक था, लेकिन इसके बाद डीजल खर्च में गिरावट आई और पेट्रोल मद का खर्च बढ़ा। 2025-26 में पेट्रोल पर सबसे ज्यादा 14.24 करोड़ रुपए खर्च हुए। इससे सरकारी परिवहन व्यवस्था में ईंधन के बदलते उपयोग का संकेत मिलता है।
इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने की जरूरत
सरकारी वाहन बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या महज 17 होना इस पूरे आंकड़े का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। एक तरफ ईंधन खर्च लगातार करोड़ों में है, वहीं दूसरी ओर इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बेहद सीमित है। ऐसे में सरकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने से ईंधन खर्च घटाने के साथ प्रदूषण कम करने में भी मदद मिल सकती है।

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