आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हम कुत्तों से खुद सर्टिफिकेट लेकर चलने के लिए क्यों नहीं कह सकते? जानें
आवारा कुत्तों के मुद्दे पर तल्ख टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों के आतंक और उनके नसबंदी से जुड़े मामले पर तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने आवारा कुत्तों के हमलों और नगर निगमों की विफलताओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को आवारा कुत्तों के आतंक और उनके नसबंदी से जुड़े मामले पर तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने आवारा कुत्तों के हमलों और नगर निगमों की विफलताओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।
सी बीच एक वकील ने टिप्पणी देते हुए कहा कि उनके इलाके में कुत्तों का आतंक हमेशा रहता है कभी कुत्ते किसी बच्चे को काटते हैं तो कभी किसी बुजुर्ग को और इतना ही नहीं कुत्ते रात भर शोर करते हैं जिसके कारण उनकी नींद और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। इसके आगे उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय न्याय संहिता के तहत अधिकारियों को 'पब्लिक न्यूसेंस' पैदा करने वाले जानवरों को हटाने का अधिकार है।
जब वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि एक ऐसा ऑनलाइन सिस्टम होना चाहिए जहां लोग उन कुत्तों की रिपोर्ट कर सकें जो नसबंदीशुदा नहीं लगते, तो जस्टिस संदीप मेहता ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा— "तो क्या हम अब कुत्तों से यह उम्मीद करें कि वे अपना नसबंदी सर्टिफिकेट साथ लेकर चलें?"

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