आमला एयरफोर्स चंदन चोरी केस: पुलिस की बड़ी लापरवाही, कोर्ट ने गिरफ्तारी अवैधानिक मानकर किया रिहा

चंदन चोरी केस में पुलिस की चूक

आमला एयरफोर्स चंदन चोरी केस: पुलिस की बड़ी लापरवाही, कोर्ट ने गिरफ्तारी अवैधानिक मानकर किया रिहा

आमला एयरफोर्स स्टेशन से चंदन चोरी मामले में गिरफ्तारी प्रक्रिया में लापरवाही पर अदालत ने पुलिस कार्रवाई को अवैध बताते हुए तीनों आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए।

बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आमला एयरफोर्स स्टेशन से चंदन के पेड़ों की चोरी के बहुचर्चित मामले में पुलिस की गंभीर लापरवाही सामने आई है। न्यायालय ने गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया का पालन न करने पर पुलिस की कार्रवाई को अवैधानिक करार देते हुए तीनों आरोपियों को रिहा करने के आदेश दिए हैं। इस निर्णय के बाद पुलिस और बचाव पक्ष के दावों में भी विरोधाभास उभरकर सामने आया है।

प्रकरण 16 नवंबर की रात का है, जब आमला एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा बाउंड्री की ग्रिल काटकर चोरों ने चार कीमती चंदन के पेड़ों की चोरी कर ली थी। चोरी गए चंदन की कीमत 60 से 70 हजार रुपये आंकी गई थी। घटना के बाद थाना आमला पुलिस ने संदीप शेंडे, पिंंटू नागले और संजय कवरेती को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था।

पुलिस के अनुसार, विशेष टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। इसके बाद ग्राम पावल और वरुड क्षेत्र से तीनों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान ग्राम कन्हडगांव के पास से चंदन की लकड़ी के पांच लठ्ठे और कटे हुए टुकड़े बरामद किए जाने का दावा किया गया। यह कार्रवाई थाना प्रभारी मुकेश ठाकुर के नेतृत्व में की गई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने अदालत में दलील दी कि पुलिस ने आरोपियों को उनकी भाषा में गिरफ्तारी का कारण नहीं बताया और न ही लिखित रूप में इसकी सूचना दी गई। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी की सूचना समय पर नहीं दी गई और विवेचक गिरफ्तारी के ठोस आधार प्रस्तुत करने में असफल रहा। अदालत ने यह भी माना कि संबंधित अपराध सात वर्ष से कम सजा की श्रेणी में आता है, ऐसे में ज्यूडिशियल रिमांड आवश्यक नहीं थी। इसी आधार पर न्यायालय ने गिरफ्तारी को अवैधानिक ठहराते हुए तीनों आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया।

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हालांकि, इस आदेश के बाद भी विवाद बना हुआ है। बचाव पक्ष का कहना है कि अदालत ने सीधे रिहाई के आदेश दिए हैं, जबकि पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जमानत पर छोड़ा गया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस भविष्य में सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करती है, तो आरोपियों की दोबारा गिरफ्तारी की जा सकती है। इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और गिरफ्तारी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो जांच एजेंसियों के लिए एक अहम सबक माने जा रहे हैं।

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