आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने की असम में प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ बैठक, इन मुद्दों पर हुई चर्चा
असम चुनाव 2026: चुनाव आयोग ने की तैयारियों की समीक्षा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग ने गुवाहाटी में राजनीतिक दलों के साथ बैठक की। दलों ने बिहू उत्सव को देखते हुए एक या दो चरणों में मतदान कराने का सुझाव दिया है।
गुवाहाटी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ ने असम में आगामी चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए मंगलवार को गुवाहाटी में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दलों के साथ बैठकें आयोजित की। इस बैठक में असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) और आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
चर्चा में चार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मान्यता प्राप्त राज्य दलों में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के नेता मौजूद थे।आयोग की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, अधिकांश राजनीतिक दलों ने आयोग से आग्रह किया कि सुचारू संचालन सुनिश्चित करने और लंबे समय तक चलने वाले प्रचार को कम करने के लिए चुनाव एक ही चरण में या अधिकतम दो चरणों में कराये जायें।
आयोग ने विज्ञप्ति में कहा, ज्यादातर दलों का मानना था कि प्रशासनिक सुविधा और मतदाता भागीदारी के लिहाज से एक चरण का चुनाव, या अधिकतम दो चरण बेहतर होंगे। बैठक के दौरान उठायी गयी एक और प्रमुख मांग यह थी कि चुनाव कार्यक्रम में असम के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक उत्सवों में से एक बिहू उत्सव का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
विज्ञप्ति में कहा गया है, राजनीतिक दलों ने अनुरोध किया कि चुनाव की तारीखों की घोषणा बिहू उत्सव को ध्यान में रखते हुए की जाए ताकि मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया और पारंपरिक उत्सवों, दोनों में पूरी तरह से भाग ले सकें। दलों ने राज्य में हाल ही में किए गए मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) की सराहना की और इसे मतदाता सूचियों की सटीकता और समावेशिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
आयोग के अधिकारियों ने उल्लेख किया कि चुनाव के शांतिपूर्ण और सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए भी सुझाव दिए गए, जिसमें जिला अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय शामिल है। बातचीत के दौरान, आयोग ने कानून के अनुसार स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। आयोग ने कहा, आयोग राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए रचनात्मक सुझावों को महत्व देता है और चुनाव कार्यक्रम तथा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देते समय उन पर सावधानीपूर्वक विचार करेगा। गौरतलब है कि असम में विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल के आसपास होने वाले हैं।

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