जल जीवन मिशन घोटाले में बड़ी कार्रवाई, एसीबी की कई राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी
15 आरोपियों के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया
एसीबी ने जल जीवन मिशन घोटाले में कई राज्यों में छापेमारी कर रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल समेत 15 आरोपियों के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया। दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और बैंक रिकॉर्ड जांचे गए। आधा दर्जन आरोपियों को राउंडअप किया गया।
जयपुर। राजस्थान में चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर मंगलवार सुबह भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की। रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल सहित 15 आरोपियों के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान कई संदिग्ध दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की गई तथा आधा दर्जन से अधिक आरोपियों को राउंडअप किया गया।
कई शहरों में एक साथ कार्रवाई :
एसीबी सूत्रों के अनुसार, जल जीवन मिशन में अनियमितताओं और कथित घोटाले की जांच के तहत यह कार्रवाई की गई। मंगलवार सुबह तड़के एसीबी की अलग-अलग टीमों ने राजस्थान के जयपुर, बाड़मेर, सीकर और जालोर सहित दिल्ली, बिहार और झारखंड में कुल 15 स्थानों पर दबिश दी। कार्रवाई को गोपनीय रखते हुए टीमों ने एक साथ छापेमारी शुरू की ताकि सबूतों से छेड़छाड़ न हो सके।
सुबोध अग्रवाल समेत 15 आरोपी जांच के घेरे में :
मामले में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल सहित 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन सभी के आवास और अन्य ठिकानों पर दस्तावेज, फाइलें, बैंक लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस खंगाले जा रहे हैं। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले थे, जिसके आधार पर यह बड़ी कार्रवाई की गई।
आधा दर्जन से अधिक आरोपी राउंडअप :
छापेमारी के दौरान एसीबी ने आधा दर्जन से अधिक आरोपियों को पूछताछ के लिए राउंडअप किया है। इनसे घोटाले से जुड़े लेनदेन, टेंडर प्रक्रिया और फंड आवंटन को लेकर पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला ?
जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया गया था। आरोप है कि इसी योजना के क्रियान्वयन में नियमों की अनदेखी करते हुए ठेके और भुगतान में अनियमितताएं की गईं, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
जेजेएम घोटाला : एसीबी की एसआईटी चार बड़े मामलों की कर रही जांच, 20 हजार करोड़ के स्पेशल प्रोजेक्ट पर फोकस
जल जीवन मिशन (जेजेएम) से जुड़े कथित घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने जांच का दायरा और विस्तृत कर दिया है। एसआईटी फिलहाल चार अहम बिंदुओं पर गहन पड़ताल कर रही है। खासतौर पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये के स्पेशल प्रोजेक्ट और उससे जुड़े टेंडर प्रक्रियाओं को जांच के केंद्र में रखा गया है।
टेंडर शर्तों में बदलाव कर बड़ी फर्मों को फायदा पहुंचाने की कोशिश :
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जल जीवन मिशन के तहत जारी किए गए टेंडर्स में नियम और शर्तों में बदलाव कर कुछ बड़ी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। टेंडर प्रक्रिया में ‘साइट इंस्पेक्शन’ की विशेष शर्त जोड़ी गई, जिससे यह स्पष्ट हो जाता था कि किन-किन फर्मों ने भाग लिया है। इससे प्रतिस्पर्धात्मक गोपनीयता और पारदर्शिता प्रभावित हुई।
हालांकि, वित्त विभाग ने अनियमितताओं की आशंका के चलते इन टेंडर्स को बाद में निरस्त कर दिया। अब एसीबी उन इंजीनियरों की भूमिका की जांच कर रही है, जिन्होंने इस तरह की विशेष शर्तें जोड़ी थीं। सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
55 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान :
जांच में यह भी सामने आया है कि श्रीश्याम और गणपति ट्यूबवेल नामक फर्मों को बिना कार्य निष्पादन के करीब 55 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इस मामले में 139 इंजीनियर जांच के दायरे में आए हैं। इनमें 15 अधिशासी अभियंता (एक्सईएन), 40 सहायक अभियंता (एईएन) और 50 कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) शामिल बताए जा रहे हैं। शेष संबंधित कार्मिकों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि भुगतान की स्वीकृति किन स्तरों पर दी गई और क्या तकनीकी व प्रशासनिक जांच प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
इरकॉन के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट का मामला :
एसआईटी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि इरकॉन के नाम पर कथित रूप से फर्जी प्रमाण पत्र किसने और किन परिस्थितियों में तैयार किए। जांच का मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि इस प्रक्रिया में किन-किन इंजीनियरों या अधिकारियों की संलिप्तता रही।
एसीबी अधिकारियों के अनुसार, दस्तावेजों की जांच, बैंक लेनदेन और तकनीकी अनुमोदनों की समीक्षा के बाद जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच आगे बढ़ने के साथ और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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