राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई : जल जीवन मिशन घोटाले में एसआईटी का शिकंजा, 9 आरोपी गिरफ्तार
पूर्व में भी हुई थी ट्रैप कार्रवाई
राजस्थान एसीबी की एसआईटी ने जल जीवन मिशन में हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया। फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए करीब 960 करोड़ के टेंडर हासिल करने और टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर का खुलासा हुआ।
जयपुर। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा गठित विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) ने जल जीवन मिशन में हुए हजारों करोड़ रुपए के बहुचर्चित भ्रष्टाचार मामले में मंगलवार अल सुबह व्यापक कार्रवाई करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई एसीबी में दर्ज प्रकरण संख्या 245/2024 में अनुसंधान के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई। ब्यूरो की लगभग डेढ़ दर्जन टीमों ने जयपुर, बाड़मेर, उदयपुर, करौली, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में एक साथ दबिश देकर आरोपियों को हिरासत में लिया।
गिरफ्तार किए गए आरोपी :
गिरफ्तार आरोपियों में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) और संबंधित परियोजनाओं से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं-
दिनेश गोयल - मुख्य अभियंता (प्रशासन)
के.डी. गुप्ता - मुख्य अभियंता (ग्रामीण)
सुभांशु दीक्षित - तत्कालीन सचिव (RWSSM), वर्तमान अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर क्षेत्र-द्वितीय
सुशील शर्मा - वित्तीय सलाहकार, अक्षय ऊर्जा
निरिल कुमार - मुख्य अभियंता, चूरू।
विशाल सक्सेना - अधिशासी अभियंता (निलंबित)
अरूण श्रीवास्तव -अतिरिक्त मुख्य अभियंता (सेवानिवृत्त)
डी.के. गौड़ - तत्कालीन मुख्य अभियंता व तकनीकी सदस्य (सेवानिवृत्त) महेंद्र प्रकाश सोनी – तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (सेवानिवृत्त)
फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर 960 करोड़ के टेंडर :
प्रकरण संख्या 145/2024 के अनुसंधान में यह सामने आया कि फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी (प्रोपराइटर: महेश मित्तल) और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी (प्रोपराइटर: पदमचंद जैन) द्वारा इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए गए।
इन फर्जी दस्तावेजों को जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के उच्च अधिकारियों की मिलीभगत से विभिन्न निविदाओं में संलग्न कर लगभग 960 करोड़ रुपये के टेंडर प्राप्त किए गए। इससे करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।
टेंडर प्रक्रिया में हेर-फेर का खुलासा :
अनुसंधान में यह भी स्पष्ट हुआ कि 50 करोड़ रुपये से अधिक के मेजर प्रोजेक्ट्स की निविदाओं में नियमों के विरुद्ध ‘साइट विजिट प्रमाण-पत्र’ की शर्त जोड़ी गई।
इस शर्त के माध्यम से बोलीदाताओं की पहचान उजागर कर टेंडर पुलिंग की गई, जिससे अप्रत्याशित रूप से ऊंचा टेंडर प्रीमियम प्राप्त हुआ। इन प्रीमियमों को विभागीय अधिकारियों द्वारा अनुमोदित किया गया, जिससे हजारों करोड़ रुपये के व्यापक भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई।
एसआईटी का गठन और जांच :
प्रकरण की त्वरित एवं प्रभावी जांच के लिए पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की गई।
एसआईटी ने तकनीकी एवं दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कर आरोपियों के विरुद्ध सशक्त प्रमाण जुटाए।
यह कार्रवाई महानिरीक्षक पुलिस (द्वितीय) राजेश सिंह एवं उपमहानिरीक्षक पुलिस (प्रथम) डॉ. रामेश्वर सिंह के निकटतम पर्यवेक्षण में की गई।
पूर्व में भी हुई थी ट्रैप कार्रवाई :
एसीबी द्वारा पूर्व में जल जीवन मिशन में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरुद्ध ट्रैप कार्रवाई करते हुए प्रकरण संख्या 215/2023 दर्ज किया गया था। इस मामले में 11 आरोपियों एवं 2 फर्मों के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।
आगे की कार्रवाई जारी :
अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में गिरफ्तार आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है।

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