बसपा का परिवारवाद को लेकर बड़ा फैसला : आनंद कुमार के बेटों को पार्टी में कोई पद नहीं, मायावती ने कहा- युवाओं को तरजीह देने की नीति पर काम कर रही पार्टी
अम्बेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों का हो विकास
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने आज परिवारवाद को लेकर बड़ा और अंतिम फैसला सुनाते हुए कहा कि अब भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में किसी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जाएगा। मायावती ने कहा कि बसपा पूरे देश और खासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति पर काम कर रही है। जेन-जी को संगठन में लगभग 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है और आगामी यूपी, उत्तराखंड, पंजाब विधानसभा चुनाव में सर्वसमाज के कर्मठ और युवा प्रतिभाओं, जिसमें महिला-पुरुष दोनों हों, को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि अम्बेडकरवादी राजनीति और संवैधानिक मूल्यों का विकास हो।
उन्होंने अपनी सरकारों के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी नौकरी, रोजगार और जेन-जी, जेन-अल्फा की बुनियादी जरूरतों पर काम किया गया, जिससे पलायन रुका। लेकिन विरोधी पार्टियों के जातिवादी रवैये से 2012 में पांचवीं बार सरकार नहीं बन सकी, जिसका पछतावा आज भी सर्वसमाज को है। परिवार को लेकर मायावती ने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर के आत्म-सम्मान के कारवां को सत्ता की मास्टर चाबी तक पहुंचाने के मिशन में किसी का रोड़ा बनना उन्हें स्वीकार नहीं। इसलिए मान्यवर कांशीराम जी की तरह उन्होंने अपने सभी सगे भाई-बहन और उनके परिवार के युवा सदस्यों को सांसद, विधायक, मंत्री जैसे किसी भी राजनीतिक लाभ से हमेशा दूर रखा है।
उन्होंने कहा कि अविवाहित होने के नाते मजबूरी में सबसे छोटे भाई आनंद कुमार को देखभाल और पार्टी की अहम जिम्मेदारियों के लिए साथ रखना पड़ा, लेकिन इसका लाभ अब उनका परिवार उठाए, यह पार्टी हित में नहीं है। इसीलिए अंतिम फैसला है कि उनके किसी बेटे को पद नहीं मिलेगा। मायावती ने आगे कहा कि जरूरत पडऩे पर आनंद कुमार अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद, जो वकालत पढ़ रही हैं, की मदद ले सकते हैं और उसकी ईमानदारी, वफादारी देखकर भविष्य में अपनी खुद की जिम्मेदारी उसे सौंप सकते हैं। बेटी के तैयार न होने पर वे आम सहमति से दलित वर्ग के किसी मिशनरी कार्यकर्ता को भी जिम्मेदारी सौंप सकते हैं, लेकिन बेटे या उनके बच्चों को नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि लड़की होने की वजह से सुरक्षा के लिए उन्हें भाई को साथ रखना पड़ा, वरना कांशीराम जी की तरह वह भी किसी को साथ नहीं रखतीं। अब बच्चों के बड़े होने पर उन्हें भी बहुत कुछ झेलना पड़ रहा है, लेकिन मोह में पड़कर पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचने देंगी। साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं को विरोधी पार्टियों और जातिवादी मीडिया के पेड प्रोपेगैंडा से सावधान रहने और निष्कासित लोगों की वापसी की खबरों को पूरी तरह फेक न्यूज बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों को बसपा में कतई वापस नहीं लिया जाएगा।

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