फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में बंपर वोटिंग: दोपहर 3 बजे तक 74 प्रतिशत मतदान, चुनावी दौड़ से पीछे हटे टीएमसी प्रत्याशी जहांगीर
टीएमसी को झटका
पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र की सभी 285 सीटों पर शांतिपूर्ण पुनर्मतदान जारी है। ईवीएम विवाद के बाद चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे इस चुनाव में दोपहर 3 बजे तक 74.10 प्रतिशत भारी मतदान दर्ज किया गया। केंद्रीय बलों की 35 कंपनियों के कड़े पहरे में पारदर्शी वोटिंग हो रही है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में हो रहे पुनर्मतदान में गुरुवार दोपहर तीन बजे तक 74.10 प्रतिशत मतदान हुआ है। मतदान सुबह सात बजे शुरू हो गया था और शाम छह बजे तक चलेगा। चुनाव आयोग ने मतदान शांतिपूर्ण ढंग और पारदर्शिता से संपन्न कराने के व्यापक प्रबंध किये हैं। इस सीट पर कुल 2.36 लाख मतदाता हैं। इनमें 1,21,300 पुरुष, 1,15,135 महिला और नौ उभयलिंगी मतदाता शामिल हैं।
इससे पहले गत 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण के दौरान कई शिकायतों के बाद फाल्टा विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान का आदेश दिया था। इस विधानसभा क्षेत्र के कई हिस्सों से आरोप सामने आए थे कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार का नाम और चुनाव चिह्न कथित तौर पर टेप और दूसरी चीजों से छुपाया गया था, जिससे व्यापक विवाद पैदा हो गया था। इसके जवाब में, आयोग ने विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर नए सिरे से मतदान कराने का निर्देश दिया।
खंडालिया हाई स्कूल के मतदान केंद्र संख्या 252 पर सुबह से ही मतदाताओं की अपने मताधिकार को इस्तेमाल करने के लिए लंबी कतारें देखी गईं। मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है और कहीं से कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आयी है। पूरे निर्वाचन क्षेत्र में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 35 कंपनियों की तैनाती के साथ सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था की गयी है। सुचारू और पारदर्शी मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की कड़ी निगरानी में मतदान कराया जा रहा है।
फाल्टा से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतदान से कुछ दिन पहले ही चुनावी दौड़ से अपने आप को अलग कर लिया था। खान निर्वाचन क्षेत्र में कहीं दिखाई नहीं दिए, जबकि उनका आवास और स्थानीय पार्टी कार्यालय दोनों बंद पाए गए। कुछ निवासियों ने आरोप लगाया कि पहले के चुनावों में श्री खान के समर्थकों द्वारा उन्हें मतदान देने से रोका गया था।

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