संसद कूच के आह्वान से डरी केन्द्र सरकार : सोनम वांगचुक को जबरन पुलिस से हटवाया, संजय सिंह ने कहा- यह अच्छी राजनीति नहीं
जंतर मंतर पर पुलिस को भेजकर युवाओं पर लाठीचार्ज कराया
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने 21 दिनों से अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षाविद सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराने की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। आप के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने आज एक्स पर एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार सोनम वांगचुक के संसद तक शांतिपूर्ण कूच के आह्वान से डर गई है। इसलिए सुबह-सुबह जंतर मंतर पर पुलिस को भेजकर युवाओं पर लाठीचार्ज कराया और सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल में भर्ती करा दिया, ताकि इस आंदोलन को कुचला जा सके। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को होने वाले संसद तक मार्च में देश के युवा, जनता और विभिन्न दलों के सांसद शामिल होने वाले थे। सरकार को पता चल चुका है कि सोनम वांगचुक की आवाज अब देश में बहुत बड़ी बनने वाली है, तो दबा दो।
सिंह ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हुए थे और अपना जीवन दांव पर लगाकर देश के उन करोड़ों युवाओं की आवाज उठा रहे थे, जो पेपर लीक से बर्बाद हो चुके थे। युवा बेबस थे और उनकी आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। सरकार ने 21 दिन तक उनसे बात नहीं की और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए एक ट्वीट करना भी जरूरी नहीं समझा। सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे बातचीत करने के लिए नहीं आया कि आखिर वे क्यों अपनी जान देने पर आमादा हैं?
आप नेता ने कहा कि आज अभी जानकारी मिली है कि अचानक पुलिस बल ने वहां पहुंचकर जंतर-मंतर को घेर लिया और नौजवानों के ऊपर लाठी चलाकर सोनम वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया है। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि उन्होंने 20 जुलाई के लिए देश की जनता, युवाओं, सांसदों और विधायकों का आह्वान किया था कि 20 जुलाई को हम लोग जंतर-मंतर से संसद की तरफ शांतिपूर्ण मार्च करेंगे, जहां से संसद का सत्र शुरू होने वाला है। सरकार को पता था कि यह आवाज बहुत बड़ी बनने वाली है, इसलिए उन्होंने दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बदलकर एक ऐसा पुलिस कमिश्नर बिठाया, जिससे सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया जा सके।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति पर लाठी चलाओ, हर व्यक्ति पर गोली चलाओ और हर व्यक्ति पर आंसू गैस के गोले छोड़ो, यह सही नहीं है। कभी किसान आंदोलन को कुचलो, कभी नौजवानों के आंदोलन को कुचलो और कभी माताओं-बहनों के आंदोलन को कुचलो, यह अच्छी राजनीति नहीं है।

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