भारत ने चाबहार के लिए दिए 12 करोड़ रुपए, ट्रंप को भी जवाब

इसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है

भारत ने चाबहार के लिए दिए 12 करोड़ रुपए, ट्रंप को भी जवाब
अमेरिका ने चाबहार पोर्ट को लेकर भारत को दी गई छूट को खत्म करने का ऐलान किया था, लेकिन इससे मोदी सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा है।

नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के ट्रेन हाईजैक करने के बाद पूरी दुनिया में सरकार और चीन की जमकर किरकिरी हो रही है। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चीन अरबों डॉलर का सीपीईसी प्रोजेक्ट चल रहा है। यही नहीं चीन की योजना ग्वादर में नेवी और सेना के बेस बनाने की है। चीन ने अरबों डॉलर खर्च करके ग्वादर में पोर्ट का विकास किया है और एयरपोर्ट बनाया है, लेकिन इसका कोई फायदा होता नहीं दिख रहा है। पाकिस्तान का ग्वादर को दुबई बनाने का सपना जहां फेल होता दिख रहा है, वहीं भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट को लेकर बड़े प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है। भारत का इरादा 4000 करोड़ खर्च करके अगले 10 साल में इस ईरानी पोर्ट की क्षमता को 5 गुना करने की है।

इससे पहले अमेरिका ने चाबहार पोर्ट को लेकर भारत को दी गई छूट को खत्म करने का ऐलान किया था, लेकिन इससे मोदी सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा है। अमेरिका ईरान पर परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए अधिकतम दबाव बनाने की नीति पर काम कर रहा है। इसी वजह से अमेरिका ने भारत के कंट्रोल वाले चाबहार पोर्ट को दी गई छूट को खत्म करने फैसला किया है। भारत सरकार 4 हजार करोड़ खर्च करके नई आधुनिक क्रेन लेना चाहती है ताकि पूरे पोर्ट का तंत्र आधुनिक बनाया जा सके। अभी चाबहार पोर्ट की क्षमता 100,000 टीईयूएस है। इसे बढ़ाकर 500,000 टीईयूएस करने की योजना है।

भारत ने चाबहार पोर्ट के लिए दी है करोड़ों डॉलर की मदद
चाबहार पोर्ट पर एक दूसरा बर्थ बनाने की भी योजना है। चाबहार पोर्ट के लिए नई क्रेन का आॅर्डर कर दिया गया है। भारत ने चाबहार पोर्ट को लेकर ईरान के साथ पिछले साल 10 साल का समझौता हुआ था। भारत ने सामान आयात करने के लिए 12 करोड़ डॉलर दिया है। भारत ने 25 करोड़ डॉलर का लाइन आॅफ क्रेडिट भी दिया है ताकि चाबहार पोर्ट का विकास किया जा सके। भारत ने अब तक 2 करोड़ 40 लाख डॉलर के पोर्ट के उपकरण ईरान को भेजे हैं। चाबहार को अन्य उपकरणों की सप्लाई करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। भारत के लिए चाबहार पोर्ट चीन और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का जवाब है। इसके अलावा भारत चाबहार पोर्ट की मदद से अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया के देशों से जुड़ जाएगा। इसके अलावा इंटरनैशनल नॉर्थ साऊथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर प्रोजेक्ट के लिए भी चाबहार पोर्ट रास्ता है। इस कॉरिडोर के जरिए भारत सीधे रूस से जुड़ गया है। भारत ईरान के रास्ते आर्मीनिया और रूस तथा यूरोप के अन्य देशों तक आसानी से सामान भेज सकेगा। यही नहीं रूस भी इस कॉरिडोर के जरिए भारत और खाड़ी के देशों तक आसानी से सामान भेज रहा है। इससे वह अमेरिकी प्रतिबंधों से आसानी से बच जा रहा है।

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