दिल्ली पहुंचे राष्ट्रपति पुतिन, पालम एयरपोर्ट पर पीएम मोदी ने किया जोरदार स्वागत, इन 8 बड़ी डील पर लग सकती है मुहर

पुतिन का भारत दौरा – 8 बड़ी डील्स पर फोकस

दिल्ली पहुंचे राष्ट्रपति पुतिन, पालम एयरपोर्ट पर पीएम मोदी ने किया जोरदार स्वागत, इन 8 बड़ी डील पर लग सकती है मुहर

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पीएम मोदी के निमंत्रण पर दो दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे। लगभग चार वर्षों बाद हो रही इस यात्रा में दोनों देश रक्षा सहयोग, व्यापार सुरक्षा और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर आठ महत्वपूर्ण डील करेंगे। 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन और शाही डिनर के साथ रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष भी मनाए जाएंगे।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज से दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे चुके हैं। बताया जा रहा है कि करीब 4 साल बाद पुतिन का ये पहला भारत दौरा है। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन भारत के साथ रक्षा सहयोग, व्यापार को बाहरी दबावों से बचाने और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों में साझेदारी आदि पर करीब 8 बड़ी ​डील करेंगे।

बता दें कि, रूसी राष्ट्रपति के भारत पहुंचने के बाद पीएम मोदी ने उनके सम्मान में एक शाही डिनर का आयोजना किया है। इससे पहले जब पीएम मोदी रूस के दौरे पर गए थे तो पुतिन ने भी उनके लिए शाही डिनर का आयोजन किया था। शुक्रवार 5 दिसंबर को राष्ट्रपति पुतिन का औपचारिक स्वागत किया जाएगा। इसके बाद 23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन होगा, जहां दोनों नेता प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसके बाद दोनों देशों के नेता मिलकर RT के नए इंडिया चैनल का शुभारंभ करेंगे और उसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उनके सम्मान में राजकीय भोज का आयोजन करेगी।

बता दें कि, राष्ट्रपति पुतिन की ये मुलाकात इसलिए भी खास है, क्योंकि भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को करीब 25 साल पूरे हो रहे हैं। भारत रूस की साझेदारी अक्टूबर 2000 में शुरू हुई थी, जिसके बाद दिसंबर 2010 में इसे बढ़ाया गया और उसके बाद इसे ‘स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया गया। बताया जा रहा है कि, शुक्रवार 5 दिसंबर की देर रात पुतिन वापस मॉस्को लौट जाएंगे। 

पुतिन के भारत दौरे से क्या बड़े लाभ मिल सकते हैं?

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बता दें कि, राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा से भारत–रूस आर्थिक सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है। ऐसे कयास लगाए जा रहे है कि, इस यात्रा के बाद दवा, ऑटोमोबाइल, कृषि और समुद्री उत्पादों के निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे व्यापार घाटा कम होगा। इसके अलावा ऐसी भी उम्मीदें जताई जा रही है कि, भारतीय व्यवसायों को रूस में बड़ा बाज़ार मिल सकता है। कई आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक समझौतों के जरिए रोजगार और सहयोग बढ़ेगा।

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