भारत की महिला वन रक्षकों की वीरता पर आधारित किताब लॉन्च, फ्रंटलाइन स्टॉफ के बारे में कराती है अवगत

सच्ची कहानियों का इसमे होना इसका महत्व बढ़ाता हैं

भारत की महिला वन रक्षकों की वीरता पर आधारित किताब लॉन्च, फ्रंटलाइन स्टॉफ के बारे में कराती है अवगत

रेंजर्स की असल जिंदगी के अनुभव दर्ज हैं, जो जोखिम भरे जंगलों में वन्यजीवों की रक्षा करते हुए समाजिक और पारिवारिक चुनौतियों का सामना करती हैं।

नई दिल्ली। राजस्थान के जंगलों और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सिरोही में रेस्क्यू क्वीन के नाम से अंजू चौहान और कोटा में  क्रोकोडाइल क्वीन के नाम से पहचान बनाने वाली प्रेम कंवर शक्तावत रेंजर्स-वुमन रेशेपिंग द कंजर्वेशन पुस्तक की नायिका बन गई हैं। रेंजर्स-वुमन रेशेपिंग द कंजर्वेशन पुस्तक में देश की 14 महिला रेंजर्स की असल जिंदगी के अनुभव दर्ज हैं, जो जोखिम भरे जंगलों में वन्यजीवों की रक्षा करते हुए समाजिक और पारिवारिक चुनौतियों का सामना करती हैं।

एक्सप्लोरिंग वुमनहुड फाउंडेशन की संस्थापक दीपाली अतुल डेओकर ने महिलाओं की अनसुनी कहानियों को पहली बार पुस्तक के रूप में सामने लाई हैं। यह पुस्तक देश की 14 महिला वन रक्षकों के जीवन, संघर्ष और बहादुरी का दस्तावेज है। पुस्तक बहुत ही सुंदर तरीके से फॉरेस्ट और फ्रंटलाइन स्टॉफ के बारे में बताती है ,फील्ड को समझने और उनमें आने वाली कठिनाई को किस प्रकार सूझ बूझ से हल कर फॉरेस्ट के प्रति जवाबदेह बनना ऐसी प्रेरणादायीं सच्ची कहानियों का इसमे होना इसका महत्व बढ़ाता हैं।

कठिन स्थितियों में करती हैं कर्तव्यपालन: यह पुस्तक उन महिला फॉरेस्ट रेंजर्स की प्रेरक और रोमांचक यात्राओं को सामने लाती है जो कठिन परिस्थितियों में जंगलों, वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं। अंजू चौहान  ने बताया कि दीपाली अतुल के द्वारा लिखित यह बुक बहुत ही सुंदर ढंग से फॉरेस्ट और फ्रंटलाइन स्टॉफ के बारे में बताती है ,फील्ड को समझने और उनमें आने वाली कठिनाई को किस प्रकार सूझ बूझ से हल कर फॉरेस्ट के प्रति जवाबदेह बनना ऐसी प्रेरणादायीं सच्ची कहानियों का इसमें होना इसका महत्व बढ़ाता हैं। 
यह पुस्तक उन महिलाओं को सम्मान देने का प्रयास है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा में अपना जीवन समर्पित किया है। पुस्तक की लेखिका दीपाली अतुल देवकर ने बताया कि यह पुस्तक उन महिलाओं को सम्मान देने का प्रयास है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा में अपना जीवन समर्पित किया है। 

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