मलयालम सिनेमा को बड़ा झटका: राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता सलीम कुमार का 56 वर्ष की उम्र में निधन, मुख्यमंत्री सतीसन ने जताया शोक
बुखार और सांस लेने में हो रही थी तकलीफ़
कोच्चि। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता मलयालम अभिनेता सलीम कुमार का शनिवार देर रात यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 56 वर्ष थे। अमृता हॉस्पिटल के मेडिकल बुलेटिन के अनुसार सलीम कुमार को कल बुखार और सांस लेने में तकलीफ एवं अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका गहन इलाज के बावजूद दिल का दौरा पड़ने से देर रात 10.43 बजे निधन हो गया। उनके परिवार में उनकी पत्नी सुनीता और दो बेटे, चंदू और आरोमल हैं। उनके पार्थिव शरीर को रविवार सुबह से अंतिम संस्कार से पहले लोगों के श्रद्धांजलि देने के लिए पारवूर टाउन हॉल में रखा जाएगा।
10 अक्टूबर 1969 को एर्नाकुलम जिले के चिट्टट्टुकरा में गंगाधरन और कौशल्या के घर जन्मे सलीम कुमार ने मिमिक्री और स्टेज परफॉर्मेंस की दुनिया से मलयालम सिनेमा के सबसे सम्मानित अभिनेताओं में से एक बनने तक का सफर तय किया। सलीम कुमार ने 'इष्टमानु नूरु वट्टम' से फिल्मों में पर्दापण किया, लेकिन साल 2000 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'थेनकासीपट्टनम' ने उनके करियर को बदल दिया। उनके अनोखे कॉमिक अंदाज़ और बेहतरीन टाइमिंग ने उन्हें मलयालम सिनेमा के सबसे पसंदीदा कॉमेडियन्स में से एक बना दिया। लगभग तीन दशकों के अपने करियर में, उन्होंने करीब 300 फ़िल्मों में काम किया और ‘कल्याणरमन’, ‘सीआईडी मूसा’, ‘मीशा माधवन’, ‘मायावी’, ‘तिलक्कम’, ‘पुलिवल कल्याणम’, ‘चथिकथा चंथु’ और ‘चेस’ जैसी फ़िल्मों में यादगार अभिनय किया। उन्होंने तमिल और ओडिया फ़िल्मों में भी काम किया।
शुरुआत में कॉमेडी से दर्शकों का दिल जीतने वाले सलीम कुमार ने बाद में खुद को एक ऐसे दमदार अभिनेता के तौर पर स्थापित किया जो जटिल और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाने में सक्षम थे। ‘पेरुमझाक्कलम’, ‘अचनुरंगथा वीडु’, ‘ग्रामोफोन’ और ‘अदामिन्ते मकान अबू’ में उनके बेहतरीन अभिनय ने उन्हें मलयालम सिनेमा के सबसे अच्छे कलाकारों में से एक के तौर पर बड़ी पहचान दिलाई। ‘अदामिन्ते मकान अबू’ में अबू के किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला; यह एक बड़ी उपलब्धि थी जिसने भारत के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में उनकी जगह पक्की कर दी।
केरल के मुख्यमंत्री वी. डी. सतीसन ने रविवार को दिग्गज मलयालम अभिनेता सलीम कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। श्री सतीसन ने एक भावपूर्ण संदेश में कहा कि सलीम कुमार लोगों को हंसाने वाले व्यक्ति से कहीं बढ़कर थे। उन्होंने कहा, "उनका मेरे साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव था और वे हमारी धरती के लिए गर्व का स्रोत थे।" उन्होंने अभिनेता की मजबूत राजनीतिक सोच को याद करते हुए कहा कि सलीम कुमार ने अपनी बात खुलकर कहने में कभी संकोच नहीं किया और व्यक्तिगत नुकसान की परवाह किए बिना अपने रुख पर अडिग रहे।
उन्होंने कहा कि अभिनेता ने साहसपूर्वक खुद को कांग्रेस समर्थक के तौर पर पेश किया और सार्वजनिक रूप से अपनी राजनीतिक राय व्यक्त करने से कभी नहीं डरे। सतीसन ने अपने चुनाव अभियानों में सलीम कुमार की सक्रिय भागीदारी को भी याद किया। उन्होंने बताया कि अभिनेता चुनाव समिति के कार्यालयों का उद्घाटन करने पर जोर देते थे और पार्टी की जीत पर परिवार के सदस्य की तरह खुश होते थे। सतीसन ने कहा, "वे अपने एक हाव-भाव से लोगों को हंसा सकते थे और दूसरे से उनकी आंखों में आंसू ला सकते थे।" उन्होंने कहा कि मलयालम सिनेमा ने एक असाधारण प्रतिभा को खो दिया है, जबकि उन्होंने एक प्रिय साथी को खो दिया है। उन्होंने दिवंगत अभिनेता के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और उन्हें श्रद्धांजलि दी।

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