मोदी, खड़गे और राहुल गांधी सहित अन्य नेताओं ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, कहा- हमेशा स्वदेशी पर दिया जोर
अन्य नेताओं ने भी बापू को नमन किया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं ने महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। मोदी ने सोशल मीडिया पर बापू के आदर्शों को आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से जोड़ा। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भी गांधीवाद, अहिंसा और सत्य की शिक्षाओं को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य नेताओं ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 78वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके अलावा अन्य नेताओं ने भी बापू को नमन किया। प्रधानमंत्री के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल भी मौजूद रहे। सभी ने गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए। इससे पहले मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता के आदर्श भारत के विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने के संकल्प के केंद्र में हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि पर मेरा शत-शत नमन। पूज्य बापू ने हमेशा स्वदेशी पर जोर दिया, जो विकसित और आत्मनिर्भर भारत के हमारे संकल्प का एक मूलभूत स्तंभ है। महात्मा गांधी का व्यक्तित्व और कर्म भारतीय पीढ़ियों को कर्तव्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में गांधीवादी मूल्यों से जुड़े एक जाने-माने भक्ति पद वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे, पर-दुख्खे उपकार करे तोये मन अभिमान ना आणे रे के माध्यम से महात्मा गांधी की शिक्षाओं को याद किया, जिसमें सहानुभूति और निस्वार्थ सेवा पर जोर दिया गया है। कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि नफरत की ताकतों ने देश को बापू से अलग कर दिया, उनका मुकाबला उनके आदर्शों से किया जाना चाहिए। जिस नफरत ने हमें बापू से जुदा किया, उसका तोड़ भी बापू की ही राह है। सत्य का उजाला, अहिंसा की ताकत, और प्रेम की करुणा। बलिदान दिवस पर राष्ट्रपिता को नमन।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि महात्मा गांधी एक व्यक्ति नहीं, एक सोच हैं - वह सोच जिसे कभी एक साम्राज्य ने, कभी एक नफऱत की विचारधारा ने और कभी अहंकारी सत्ता ने मिटाने की असफल कोशिश की। मगर राष्ट्रपिता ने हमें आजादी के साथ यह मूलमंत्र दिया कि सत्ता की ताक़त से बड़ी सत्य की शक्ति होती है- और हिंसा व भय से बड़े अहिंसा और साहस। यह सोच मिट नहीं सकती, क्योंकि गांधी भारत की आत्मा में अमर हैं। बापू को उनके शहीदी दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।

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