जानें राज काज में क्या है खास 

चर्चा में खेमों की अदला-बदली 

जानें राज काज में क्या है खास 

सूबे के राज को लेकर चुनावी जंग के तो अभी ढाई साल हैं, लेकिन हाथ वाले भाई लोगों में अभी से खिचड़ी पकनी शुरू हो गई।

कुछ तो पक रहा है :

सूबे के राज को लेकर चुनावी जंग के तो अभी ढाई साल हैं, लेकिन हाथ वाले भाई लोगों में अभी से खिचड़ी पकनी शुरू हो गई। दो दिशाओं में चल रहे हाथ वाले लीडर्स को एक राह पर लाने के लिए आलाकमान की टीम उन्हें एक जाजम पर लाने के लिए कोशिश में जुट गई है। इन चर्चों को उस समय जोर मिल गया, जब बीते मंगल को दोनों लीडर्स को दिल्ली में तलब किया गया। इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के ठिकाने पर चर्चा है कि दिल्ली वाले लीडर अगर जोधपुर वाले अशोक जी को मनाने में सफल हो गए, तो सबकुछ ठीक हो जाएगा, वरना सारी मेहनत ढाक के तीन पात होकर रह जाएगी। अब इन भाई लोगों को कौन समझाए कि जोधपुर वाले भाई साहब के मन में क्या है, वह कोई नहीं जानता। वे जब दाएं हाथ से कुछ करते हैं, तो बाएं हाथ तक को पता नहीं लगने देते। लेकिन यह सही है कि हाथ वालों में कुछ तो पक रहा है।

फिर निकला लाल डायरी का भूत :

लाल डायरी का भूत है कि निकलने का नाम ही नहीं लेता। गुजरे जमाने में राज के रत्न रहे तुला राशि वाले बन्नाजी के ढील में आकर खूब ऊधम मचाया तो, अब सामने वाले के शरीर में घुस कर बोलने लगा है। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि लाल डायरी की आड़ में गुढ़ा वाले राजेन्द्रजी ने पहले वाले राज की पोल खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। हर कोई लाल डायरी के पन्नों को पढ़ने के लिए आतुर था। सूबे के राज के लिए हुई चुनावी जंग के बाद लाल डायरी के पन्ने बंद हो गए थे, किन्तु बीते हफ्ते खुद ही जोधपुर वाले भाई साहब ने लाल डायरी को अपनी जुबान पर लाकर चर्चा में ला दिया। सगाई समारोह में मिठाई खाकर भाई साहब ने गुढ़ाजी को लाल डायरी वाला के नाम से संबोधित कर बहुत कुछ इशारा कर दिया, जिसको समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।

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चर्चा में खेमों की अदला-बदली :

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सूबे में इन दिनों खेमों की अदला-बदली हार्ड कोर वर्कर्स की जुबान पर कुछ ज्यादा ही है। खेमों की अदला-बदली दोनों तरफ है, मगर चर्चा भगवा वाले भाई लोगों में ज्यादा है। हो भी क्यों नहीं, मामला भी कुछ ऐसा ही है। अब देखो न, गुजरे जमाने में जो भाई लोग मैडम को देखकर नजरें चुराते थे, वे आजकल अगल-बगल में खड़े नजर आते हैं। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर भी अब संतुष्ट और असंतुष्टों के कमरे तक बदल गए। कानाफूसी है कि मैडम ने चुप रह कर जो असर दिखाया था, उसमें वे कामयाब हो गई है।

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एक जुमला यह भी :

सूबे में भी इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि पॉलिटिशियन की अपने बेटों की चिन्ता को लेकर है। जुमले की चर्चा भी दोनों बड़े दलों के ठिकानों पर हार्ड कोर वर्कर्स में हुए बिना नहीं रहती। जुमला है कि एक उम्र के बाद बेटा जो चाहता है, वही पिता करता है। बिहारी नीतीष बाबू ने भी वो किया, जो दूसरे नेता करते हैं। मरु भूमि में भी आधे से ज्यादा नेता पॉलिटिक्स में विरासत से ही आए हैं। यह खेल नया नहीं है, बल्कि पीढी दर पीढी चल रहा है। हमारे सूबे मे ंतो उप चुनाव तो परिवारजनों के लिए रिजर्व हो चुके हैं।

-एल. एल. शर्मा 
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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