हंगामे के बीच लोकसभा में MSME संशोधन विधेयक पास, कारोबार के आधार पर भी तय होगा उद्यमों का वर्गीकरण

आसान होगी भुगतान प्रक्रिया

हंगामे के बीच लोकसभा में MSME संशोधन विधेयक पास, कारोबार के आधार पर भी तय होगा उद्यमों का वर्गीकरण
विपक्षी हंगामे के बीच लोकसभा ने 'सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026' को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस कानून से छोटे उद्योगों के बकाए के त्वरित भुगतान, डिजिटल पंजीयन तथा मध्यस्थता के लिए समय-सीमा तय होगी, जिससे एमएसएमई क्षेत्र को तरलता और मजबूती मिलेगी।

नई दिल्ली। लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच शुक्रवार को "सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026" बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसके साथ ही राज्यसभा से पहले ही पारित इस विधेयक पर संसद की मुहर लग गई। पीठासीन अधिकारी ने एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की, विपक्षी सदस्य चढ़ावा चोरी तथा छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच आवश्यक पत्र सदन के पटल पर रखवाने के बाद उन्होंने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी से "सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026" विचार एवं पारित करने के लिए सदन में पेश करवाया। पीठासीन अधिकारी ने विधेयक पर संशोधन देने वाले सदस्यों के नाम भी पुकारे, लेकिन हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने विधेयक को बिना चर्चा के सदन के समक्ष रखा, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

विधेयक की विशेषता बताते हुए कहा गया है कि इसके पारित होने से एमएसएमई के वर्गीकरण के लिए संयंत्र एवं मशीनरी या उपकरण में निवेश के साथ कारोबार को भी आधार बनाया जाएगा तथा इसकी सीमा केंद्र सरकार अधिसूचना के माध्यम से तय की जाएगी। सभी एमएसएमई के लिए पंजीकरण स्वैच्छिक होगा तथा केंद्र और राज्य सरकारें इसके लिए डिजिटल मंच अधिसूचित कर सकेंगी। विधेयक में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए एमएसएमई से वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद के सभी बिलों का भुगतान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टी-रीडीएस) के माध्यम से करना अनिवार्य किया गया है। केंद्र और राज्य सरकारें अन्य सार्वजनिक उपक्रमों, प्राधिकरणों एवं संस्थाओं के लिए भी यह व्यवस्था लागू कर सकेंगी।

विवादों के शीघ्र निपटारे के लिए मध्यस्थता और पंचाट की प्रक्रिया को विधेयक में समयबद्ध बनाया गया है। पहली सुनवाई की तिथि से 90 दिनों के भीतर मध्यस्थता पूरी करनी होगी। मध्यस्थता विफल होने पर 30 दिनों के भीतर मामला पंचाट में भेजना होगा तथा दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के भीतर निर्णय सुनाना होगा। परिषद या पंचाट के आदेश को चुनौती दिए जाने की स्थिति में न्यायालय जमा राशि का उपयुक्त हिस्सा एमएसएमई आपूर्तिकर्ता को देने का निर्देश दे सकेगा। यदि मामला छह महीने से अधिक लंबित रहता है तो पुरस्कार राशि का कम से कम 50 प्रतिशत आपूर्तिकर्ता को देने का प्रावधान किया गया है।

विधेयक में कुछ अपराधों का गैर-आपराधीकरण करते हुए पहली बार गलत जानकारी देने या आवश्यक सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर चेतावनी तथा बाद के मामलों में जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वार्षिक खातों में एमएसएमई बकाये का विवरण नहीं देने पर भी चरणबद्ध जुर्माने की व्यवस्था की गई है। संशोधन लागू होने के बाद जुर्माने की न्यूनतम राशि में प्रत्येक तीन वर्ष बाद 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी। साथ ही केंद्र सरकार विकास आयुक्त को निर्णय अधिकारी नियुक्त करेगी तथा उनके आदेशों के विरुद्ध लघु एवं मध्यम उद्यम सचिव के समक्ष अपील की जा सकेगी।

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