लापता होने पर उम्र-लिंग नहीं देखेगी पुलिस, तुरंत FIR जरूरी : सुप्रीम कोर्ट
किसी भी उम्र के व्यक्ति पर समान रूप से लागू होगा
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लापता लोगों को लेकर अपने अहम निर्देश को स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति के गायब होने की सूचना मिलते ही पुलिस को तत्काल FIR दर्ज करनी होगी। यह निर्देश बच्चे, महिला, पुरुष या। कोर्ट ने साफ किया कि उसके पूर्व आदेश में इस्तेमाल किया गया ‘व्यक्ति’ शब्द केवल बच्चों तक सीमित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर हलफनामा भी देना पड़ सकता है।
दरअसल, 22 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सभी पुलिस थानों को निर्देश दिया था कि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलते ही बिना किसी प्रारंभिक जांच का इंतजार किए FIR दर्ज की जाए। पुलिस परिवार या अभिभावकों को खुद तलाश करने के लिए कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
कोर्ट ने कहा कि लापता होने के बाद शुरुआती घंटे ‘गोल्डन आवर्स’ होते हैं। इसी दौरान तलाश शुरू होने पर सुरक्षित बरामदगी की संभावना सबसे अधिक रहती है। FIR में BNS, 2023 के साथ अपहरण, बहला-फुसलाकर ले जाने और मानव तस्करी से जुड़े प्रावधान शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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