राम मंदिर कोष में कथित गड़बड़ी पर प्रमोद तिवारी ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना, बोले-ट्रस्ट से इंसाफ की उम्मीद नहीं, दोषियों को मिले सजा

आरोपी ही कर रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस

राम मंदिर कोष में कथित गड़बड़ी पर प्रमोद तिवारी ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना, बोले-ट्रस्ट से इंसाफ की उम्मीद नहीं, दोषियों को मिले सजा
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर ट्रस्ट और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने मंदिर कोष में कथित वित्तीय अनियमितताओं को 'लूट' करार देते हुए कहा कि करोड़ों राम भक्त इस घटना से निराश हैं। तिवारी ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि जिन पर गड़बड़ी और हेराफेरी के आरोप हैं, वे खुद ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दे रहे हैं, जिससे निष्पक्ष न्याय की उम्मीद खत्म हो गई है।

नई दिल्ली। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता एवं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर कोष में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि राम भक्तों को ट्रस्ट से इंसाफ की उम्मीद नहीं है तथा मंदिर के चढावा चोरी में लिप्त दोषियों को सजा मिलनी चाहिये। तिवारी ने बयान जारी कर कहा कि ट्रस्ट की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद करोड़ों राम भक्त निराश और हताश हैं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तिवारी ने कहा कि यदि मंदिर के कोष में हेराफेरी और डकैती हुई है और धन की बरामदगी भी हुई है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति पर आरोप हैं, वही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है। उनके अनुसार, इस मामले में ट्रस्ट से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है और दोषियों के साथ-साथ उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर किसी राजनीतिक दल ने नहीं, बल्कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद बना है। इसलिए इसकी पवित्रता और श्रद्धालुओं की आस्था से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता। समारोहों पर हुए खर्च का उल्लेख करते हुए तिवारी ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े आयोजनों पर 124 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिनमें झंडा फहराने पर 10 करोड़ रुपये और जन्मभूमि परिसर में पंडाल लगाने पर 114 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया। उन्होंने इसे "लूट" और "डकैती" करार देते हुए कहा कि राम भक्तों को जागरूक होकर जवाबदेही की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह 1980 के दशक से राम मंदिर आंदोलन को देखते आ रहे हैं और पर्यटन मंत्री रहते हुए राम की पैड़ी तथा रामकथा पार्क के विकास में उनका भी योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के नाम पर यदि किसी ने पाप किया है, तो उसे कानून के तहत कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

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