सैलजा का केंद्र पर बड़ा हमला: जीडीपी के 60 प्रतिशत से अधिक कर्ज पर पहुंची सरकार, अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की मांग
देश को कर्ज के जाल में धकेलने का आरोप
चंडीगढ़। हरियाणा में सिरसा लोकसभा सीट से सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश को विकास के नाम पर कर्ज के बोझ तले दबाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार जीडीपी वृद्धि का प्रचार कर रही है, जबकि सरकारी कर्ज उससे कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है। कुमारी सैलजा ने कहा कि वर्ष 2008 में भारत की जीडीपी लगभग एक लाख 20 हजार करोड़ डॉलर थी, जो 2026 तक बढ़कर चार लाख 10 हजार करोड़ डॉलर होने का अनुमान है। केंद्र सरकार का कर्ज 27 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 214 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। उनके अनुसार, 2014 में कर्ज-से-जीडीपी अनुपात करीब 45 प्रतिशत था, जो अब लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार भारी कर्ज लेकर विकास का भ्रम पैदा कर रही है तथा विज्ञापनों, प्रचार अभियानों और दिखावटी परियोजनाओं पर खर्च बढ़ा रही है जबकि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी से युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। लाखों सरकारी पद खाली हैं, नये रोजगार के अवसर सीमित हैं और छोटे-मध्यम उद्योग आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कर्ज के विरोध में नहीं है, बशर्ते उसका उपयोग रोजगार सृजन, उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण और आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाये। उन्होंने केंद्र सरकार से देश की आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने तथा रोजगार एवं उत्पादन आधारित आर्थिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की।

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