यूपीईएस ने जयपुर में पेश किया ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ का विज़न, एआई-फर्स्ट शिक्षा मॉडल पर जोर

यूपीईएस ने जयपुर में पेश किया 'यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो' विज़न

यूपीईएस ने जयपुर में पेश किया ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ का विज़न, एआई-फर्स्ट शिक्षा मॉडल पर जोर
शोध-आधारित यूपीईएस (UPES) विश्वविद्यालय ने खुद को 'एआई-फर्स्ट' संस्थान के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। ओपनएआई से साझेदारी के तहत 19,100 से अधिक छात्रों को उन्नत एआई टूल्स और पर्सनल एआई ट्यूटर मिलेंगे। क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग 2026 में यूपीईएस देश के निजी विश्वविद्यालयों में पहले स्थान पर है।

जयपुर। भारत के अग्रणी बहुविषयक एवं शोध-आधारित विश्वविद्यालयों में से एक यूपीईएस (UPES) ने जयपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान खुद को ‘एआई-फर्स्ट’ विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की अपनी महत्वाकांक्षी पहल को विस्तार से प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय ने ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टुमॉरो’ के अपने विज़न को साझा करते हुए बताया कि भविष्य की शिक्षा अब केवल पारंपरिक पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उद्योग सहभागिता, शोध उत्कृष्टता और बेहतर करियर परिणामों पर आधारित होगी।

कार्यक्रम में बताया गया कि दुनिया तेजी से एआई, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर से गुजर रही है, जिससे उद्योगों की कार्यप्रणाली और रोजगार की प्रकृति में बड़े बदलाव आ रहे हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं, बल्कि एआई दक्षता, विश्लेषणात्मक सोच, अनुकूलनशीलता और समस्या समाधान जैसे कौशलों से भी लैस करें।

इसी दिशा में यूपीईएस ने हाल ही में ओपनएआई के साथ साझेदारी की है। इस सहयोग के तहत विश्वविद्यालय के 19,100 से अधिक छात्रों और 1,500 फैकल्टी सदस्यों को उन्नत एआई टूल्स तक निःशुल्क और नियंत्रित पहुंच प्रदान की जा रही है। विश्वविद्यालय अपने सभी शैक्षणिक कार्यक्रमों में 33 प्रतिशत तक एआई का एकीकरण कर रहा है। साथ ही प्रत्येक छात्र को एक उन्नत एआई ट्यूटर उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पाठ्यक्रम आधारित अध्ययन, अवधारणाओं की स्पष्टता, अभ्यास सहायता और बहुभाषी शिक्षण में मदद करेगा।

कार्यक्रम में राजस्थान के संदर्भ को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने बताया कि राजस्थान आज देश के तेजी से उभरते नवाचार और स्टार्टअप केंद्रों में शामिल हो चुका है। राज्य में 5,200 से अधिक डीपीआईआईटी-पंजीकृत स्टार्टअप और 6,000 से अधिक आई-स्टार्ट पंजीकृत स्टार्टअप सक्रिय हैं। ऐसे परिदृश्य में उद्योगों को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो डिजिटल कौशल, उद्यमशीलता और तकनीकी दक्षता के साथ रोजगार बाजार में प्रवेश कर सकें।

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यूपीईएस के प्रो-वाइस चांसलर (स्टूडेंट सक्सेस) डॉ. अभिषेक सिन्हा ने कहा कि भविष्य की शिक्षा केवल पाठ्यक्रमों को अपडेट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के सीखने, सोचने और तकनीक के साथ जुड़ने के तरीके को बदलने का समय है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का एआई-फर्स्ट दृष्टिकोण तकनीक, उद्योग और अंतर्विषयक शिक्षा को जोड़कर छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार कर रहा है।

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यूपीईएस ने कार्यक्रम के दौरान अपने मजबूत उद्योग सहयोग नेटवर्क की भी जानकारी दी। विश्वविद्यालय वर्षों से आईबीएम, इन्फोसिस, बजाज ऑटो, एचपी, बॉश, एचसीएल टेक, मर्क, सिस्को, ज़ेबिया, टाटा पावर और एलएंडटी जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहा है। इन सहयोगों के माध्यम से छात्रों को वास्तविक परियोजनाओं, उद्योग विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और व्यावहारिक अनुभव का अवसर मिलता है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यूपीईएस ने कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ साझेदारी स्थापित की है। इनमें यूसी बर्कले, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लासगो, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग और यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स जैसे संस्थान शामिल हैं। इन साझेदारियों के माध्यम से छात्रों को वैश्विक शिक्षा, छात्र विनिमय कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय करियर अवसरों का लाभ मिलता है।

विश्वविद्यालय ने छात्रों के समग्र विकास के लिए भी कई अभिनव पहल शुरू की हैं। ‘स्कूल फॉर लाइफ’ कार्यक्रम छात्रों को नेतृत्व क्षमता, जीवन कौशल और करियर तैयारी में सहायता प्रदान करता है। वहीं ‘डिज़ाइन योर ओन डिग्री’ पहल के तहत छात्र 50 से अधिक अनूठे संयोजनों के माध्यम से अपनी रुचि और करियर लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। यूपीईएस रनवे के जरिए अब तक 250 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग दिया जा चुका है।

विधि शिक्षा के क्षेत्र में यूपीईएस स्कूल ऑफ लॉ ने एआई एंड लॉ, ब्लॉकचेन, डेटा एनालिटिक्स, आर्बिट्रेशन और कॉर्पोरेट लॉ जैसे आधुनिक विषयों को अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। वहीं यूपीईएस स्कूल ऑफ बिजनेस छात्रों को एआई, फिनटेक, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटल बिजनेस जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर रहा है।

क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 के अनुसार यूपीईएस ने शैक्षणिक प्रतिष्ठा के आधार पर भारत के निजी विश्वविद्यालयों में पहला स्थान हासिल किया है। एनआईआरएफ 2025 में विश्वविद्यालय को यूनिवर्सिटी श्रेणी में 45वां स्थान प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, 50 से अधिक फैकल्टी सदस्य स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची के अनुसार दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत शोधकर्ताओं में शामिल हैं। विश्वविद्यालय ने वर्ष 2025-26 में लगभग 800 रिक्रूटर्स की भागीदारी के साथ मजबूत प्लेसमेंट रिकॉर्ड भी दर्ज किया है, जहां उच्चतम पैकेज 54 लाख रुपये प्रतिवर्ष रहा।

यूपीईएस का मानना है कि एआई, उद्योग और नवाचार आधारित यह नया शिक्षा मॉडल छात्रों को न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य की नौकरियों और वैश्विक अवसरों के लिए भी तैयार करेगा।

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