पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : भाजपा और टीएमसी ने 70 प्रतिशत से अधिक सीटों पर युवाओं को दिया टिकट; युवाओं पर दांव लगा रही पार्टियां, पूर्व सैनिक से लेकर पत्रकार तक मैदान में

बंगाल चुनाव 2026: राजनीति में 'पीढ़ीगत बदलाव' का शंखनाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव : भाजपा और टीएमसी ने 70 प्रतिशत से अधिक सीटों पर युवाओं को दिया टिकट; युवाओं पर दांव लगा रही पार्टियां, पूर्व सैनिक से लेकर पत्रकार तक मैदान में

बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी ने युवाओं पर बड़ा दांव खेला है। टीएमसी ने 60 वर्ष से कम उम्र के 219 उम्मीदवारों को उतारकर 'न्यू तृणमूल' विजन पेश किया, वहीं भाजपा के 196 प्रत्याशी 55 वर्ष से कम आयु के हैं। यह बदलाव दशकों पुरानी 'सीनियरिटी' की राजनीति को पीछे छोड़ युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दे रहा है।

कोलकाता। बंगाल की राजनीति इस बार केवल विचारधारा और नारों की जंग नहीं है, बल्कि यह एक बड़े जनरेशन चेंज (पीढ़ीगत बदलाव) की भी गवाह बन रही है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल और भाजपा दोनों ने टिकट बंटवारे में युवाओं पर बड़ा दांव खेलकर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाला दौर नई पीढ़ी का हो सकता है। दोनों दलों के उम्मीदवारों की सूचियों का विश्लेषण करें तो साफ झलकता है कि अनुभव के साथ युवा ऊर्जा का संतुलन बिठाने की पुरजोर कोशिश की गई है। तृणमूल ने एक व्यक्ति, एक पद और उम्र की अनौपचारिक सीमा को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
 
टीएमसी के 219 उम्मीदवार 60 वर्ष से कम उम्र के
 
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच लंबे मंथन के बाद, तृणमूल ने इस बार केवल 25 प्रतिशत वरिष्ठ उम्मीदवारों (60 वर्ष से ऊपर) को मैदान में उतारा है। 2021 में यह आंकड़ा 42.4 प्रतिशत था। तृणमूल की रणनीति अब उन 219 उम्मीदवारों पर टिकी है जिनकी उम्र 60 वर्ष से कम है। हालांकि, पार्टी ने समर मुखर्जी (83) और शोभनदेव चट्टोपाध्याय (82) जैसे दिग्गजों को बरकरार रखकर यह भी स्पष्ट किया है कि अनुभव और विरासत को पूरी तरह दरकिनार नहीं किया जा सकता। 
 
नई पीढ़ी का नया विजन
 
भाजपा में युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखती है। उदाहरण के तौर पर नितिन नवीन जैसे अपेक्षाकृत युवा नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर पार्टी ने संकेत दिया है कि संगठन में नई पीढ़ी को आगे लाने की नीति केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण है। वहीं, तृणमूल में ममता बनर्जी के साथ-साथ अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका भी इसी बदलाव का प्रतीक है। अभिषेक का संगठनात्मक विस्तार और युवा कार्यकतार्ओं के बीच उनकी पकड़, पार्टी के भविष्य की दिशा को इंगित करती है।
 
बदलता राजनीतिक मिजाज
 
दशकों तक बंगाल की राजनीति पर काबिज वामपंथी दल अपनी सीनियरिटी के लिए जाने जाते थे, जहां नेतृत्व की सीढ़ी चढ़ने में उम्र बीत जाती थी। आज भाजपा और तृणमूल ने इस परिपाटी को तोड़ दिया है। तृणमूल के लिए यह बदलाव अभिषेक बनर्जी के न्यू तृणमूल विजन को मजबूती देता है, वहीं भाजपा के लिए यह जेन-जेड और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं से जुड़ने का जरिया है।
 
आंकड़ों में युवा झुकाव
 
भाजपा: 255 में से 196 उम्मीदवार 55 वर्ष से कम आयु के।
भाजपा: 65 उम्मीदवार हैं 40 वर्ष से कम उम्र के।
तृणमूल: 291 में से 176 उम्मीदवार 31 से 50 वर्ष आयु वर्ग के।
तृणमूल: 60 से अधिक आयु वर्ग की हिस्सेदारी घटकर लगभग 25 प्रतिशत हुई।

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