कॉमनवेल्थ गेम्स : शर्मिला धनखड़ ने शॉटपुट में जीता गोल्ड, शायला को ब्रॉन्ज
दूसरी शादी के बाद मिली नई राह
ग्लासगो। भारत की शर्मिला धनकड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं की पैरा शॉटपुट एफ-57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया। शर्मिला ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो कर यह उपलब्धि हासिल की। इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने कांस्य पदक अपने नाम किया। यह मौजूदा खेलों में भारत का दूसरा स्वर्ण पदक है। शर्मिला से पहले रविवार को वेटलिफ्टिंग में मीरा बाई चानू ने 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।
ऑस्ट्रेलिया 25 गोल्ड के साथ शीर्ष पर :
इसके साथ ही, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के पदकों की संख्या 10 हो गई है और वह तालिका में 8वें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया 26 गोल्ड सहित 59 मेडल के साथ पहले स्थान पर है।
एफ-57 कैटेगरी क्या है ?
एफ-57 कैटेगरी में उन पैरा एथलीट्स को शामिल किया जाता है, जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं या जिनकी मांसपेशियों की ताकत कम होती है। शर्मिला धनखड़ हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव की रहने वाली हैं। 2 साल की उम्र में पोलियो की शिकार हो गई थीं, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। पिता छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित हैं। बेहतर इलाज नहीं हो सका। आर्थिक तंगी के बीच कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई।
ट्रेनिंग के लिए बेचना पड़ा घर :
शर्मिला के लिए पैरा एथलेटिक्स का सफर आसान नहीं था। 34 साल की उम्र में उन्होंने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में एफ-57 कैटेगरी की सीटेड शॉटपुट इवेंट की ट्रेनिंग शुरू की। आर्थिक तंगी इतनी थी कि 2023 में ट्रेनिंग का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर बेच दिया। इसके बाद परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन शर्मिला ने अभ्यास नहीं छोड़ा।
दूसरी शादी के बाद मिली नई राह :
26 साल की उम्र में पति ने उन्हें घर से निकाल दिया। तब तक उनकी दो बेटियां हो चुकी थीं। वह दोनों बेटियों को लेकर मायके लौट आईं। 28 साल की उम्र में उन्होंने अजीत से दूसरी शादी की। अजीत ने उन्हें पैरा एथलेटिक्स में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया और हर कदम पर उनका साथ दिया।

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