संस्कृत दिवस-28 को...राजस्थान की संस्कृत शिक्षा अनदेखी की चपेट में, संस्कृत विश्वविद्यालय में एक मात्र सहायक कुलसचिव
43.3 प्रतिशत पद रिक्त
जयपुर। संस्कृत को ‘देवताओं की भाषा’और ‘सभी भाषाओं की जननी’ कहा गया है, लेकिन यथार्थ के धरातल पर देखें तो प्रदेश में संस्कृत शिक्षा पूरी तरह अनदेखी की चपेट में हैं। संस्कृत विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव के तीन में से एक पद ही भरा हुआ है, वे भी संस्कृत शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के यहां प्रतिनियुक्ति पर हैं। राज्य में संस्कृत शिक्षा (स्कूल स्तर) के 14,190 स्वीकृत पदों में से 6,142 पद रिक्Ñत हैं। अर्थात संस्कृत शिक्षा के 43.3 प्रतिशत खाली चल रहे हैं।
स्कूलों में खाली पदों की स्थिति :
प्रधानाचार्य स्वीकृत पद 496 में से 284 पद रिक्त, प्राध्यापक 1240 में 336, वरिष्ठ अध्यापक 3064 में से 336 पद रिक्त, वरिष्ठ कम्प्युटर अनदेशक के 46 और बेसिक कम्प्युटर अनुदेशक के 214 में से 214 पद रिक्त हैं। उनको भरने के लिए 23 अगस्त को ही परीक्षा हुई हैं। अध्यापक लेवल-2 के 3627 में से 2598 पद रिक्त हैं। चतुर्थी श्रेणी कर्मचारी के 316 में से 523 पद रिक्त हैं। शारीरिक शिक्षा अध्यापक के 213 में से 173 पद रिक्त हैं।
कुलसचिव प्रतिनियुक्त पर, डीआर के दोनों पद रिक्त :
रामानन्दाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव के चार पद स्वीकृत हैं, जिसमें से तीन पद खाली हैं। एक पद पर जयनारायण विजय पदासीन हैं, लेकिन वे भी भाजपा सरकार बनने के बाद से ही संस्कृत शिक्षा मंत्री के यहां प्रतिनियुक्ति पर हैं। विश्वविद्यालय के प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2025-26 के अनुसार विश्वविद्यालय में 864 पद हैं, जिसमें से दर्शन विभाग में चार,बीए/बीएससी/ योग तृतीय वर्ष में 33 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
संस्कृत शिक्षा में घटी विद्यार्थियों की संख्या :
पिछले चार सालों में स्कूली शिक्षा में संस्कृत विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी तेजी से कमी आई है। 2021-22 में 1,67,215 विद्यार्थियों की संख्या सत्र 2024-25 में 1,24,922 ही रह गई। विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी के 16वीं विधानसभा के चतुर्थ सत्र में तारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया कि स्कूलों के लिए स्वीकृत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 616 पदों में से 523 पद खाली हैं।

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