एक और हिंदू की मौत से थर्राया बांग्लादेश, आखिर कब होगा अल्पसंख्यकों के लिए पड़ोसी देश सुरक्षित? भारत ने की कड़ी आलोचना

चुनावी माहौल में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों से बढ़ी चिंता

एक और हिंदू की मौत से थर्राया बांग्लादेश, आखिर कब होगा अल्पसंख्यकों के लिए पड़ोसी देश सुरक्षित? भारत ने की कड़ी आलोचना

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे पड़ोसी देश की आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकार स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

ढाका। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे पड़ोसी देश की आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकार स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते कुछ दिनों में कई हिंदुओं की निर्मम हत्याओं ने देश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि वह इन घटनाओं को “प्रोपेगंडा” बताकर टाल रही है, जबकि ज़मीनी हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बता दें कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर ये हमले उस समय हो रहे हैं जबकि आने वाले समय में यहां चुनाव होने वाले हैं। 

इसी बीच, मशहूर हिंदू संगीतकार और आवामी लीग के वरिष्ठ नेता प्रलय चाकी की पुलिस हिरासत में मौत ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। जानकारी के अनुसार, 60 वर्षीय प्रलय को जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था, बता दें कि 16 दिसंबर को उन्हें पाबना स्थित उनके घर से उठाया गया और बाद में गिरफ्तारी दिखाई गई। पुलिस का दावा है कि प्रलय की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई और उन्हें पहले पाबना जनरल अस्पताल तथा बाद में राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां कार्डियक अरेस्ट से उनकी मृत्यु हो गई।

हालांकि, परिवार ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस के मुताबिक, हमलावरों ने पहले समीर के साथ मारपीट की, फिर चाकू मारकर हत्या कर दी और उसका ऑटो रिक्शा लूटकर फरार हो गए। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। हालिया राजनीतिक अस्थिरता और आगामी राष्ट्रीय चुनावों के बीच इन समुदायों पर हमलों में तेज़ी आई है। अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने सरकार की निष्क्रियता पर गहरी चिंता जताई है। इस बीच परिवार ने इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि प्रशासन ने मौत को प्राकृतिक बताया है। भारत ने भी इन घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। 



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