महादेव सट्टा ऐप मामले में CBI को बड़ी सफलता, मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर का ओमान से प्रत्यर्पण, आज होगी रायपुर कोर्ट में पेशी
दुबई से संचालित होता था अवैध नेटवर्क
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बड़ी सफलता मिलने की खबर है। मामले के मुख्य आरोपी एवं ऐप के प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। चंद्राकर को सोमवार रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए जाने की संभावना है। सीबीआई से आज प्राप्त जानकारी के अनुसार इंटरपोल की ओर से जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान पुलिस ने सौरभ चंद्राकर को हिरासत में लिया था। इसके बाद सीबीआई की टीम ओमान पहुंची और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे भारत लाया गया। इस घटनाक्रम को महादेव सट्टा ऐप मामले की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीबीआई ने इस प्रकरण में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं और दोनों में आरोपपत्र भी दाखिल कर चुकी है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े धनशोधन के पहलुओं की जांच कर रहा है। चंद्राकर की अदालत में पेशी के बाद उसकी हिरासत और आगे की पूछताछ को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। सौरभ चंद्राकर मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई का निवासी है। जानकारी के मुताबिक ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारोबार में आने से पहले वह कपड़े की दुकान में काम करता था और बाद में उसने जूस की दुकान भी संचालित की थी।
बताया जाता है कि वर्ष 2019 में चंद्राकर दुबई गया था। इसके बाद उसने अपने सहयोगी रवि उप्पल को भी वहां बुलाया। दोनों ने मिलकर महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के कारोबार का विस्तार किया। जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क के माध्यम से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टेबाजी संचालित की जा रही थी। महादेव सट्टा ऐप से जुड़े मामले की शुरुआती गतिविधियां वर्ष 2016 से बताई जाती हैं। आरोप है कि सौरभ चंद्राकर ने रवि उप्पल और अतुल अग्रवाल के साथ मिलकर महादेव बुक नाम से ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन शुरू किया था। बाद में इसका नेटवर्क देश और विदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक फैल गया।
इस प्लेटफॉर्म के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और बैडमिंटन सहित विभिन्न खेलों पर सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके अलावा पोकर, तीन पत्ती, वर्चुअल गेम्स और चुनाव परिणामों पर भी दांव लगाए जाने के आरोप हैं। जांच से जुड़ी जानकारियों के अनुसार वर्ष 2020 में चंद्राकर और उसके सहयोगियों ने हैदराबाद के बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म रेड्डी अन्ना का करीब 1000 करोड़ रुपये में अधिग्रहण किया था। बताया जाता है कि इसके बाद महादेव ऐप के उपयोगकर्ताओं की संख्या और कारोबार में तेजी से वृद्धि हुई तथा इसका वार्षिक टर्नओवर हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
महादेव सट्टा ऐप से जुड़े कथित अवैध कारोबार का आंकड़ा करीब 6000 करोड़ रुपये बताया गया है। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क के माध्यम से बड़े पैमाने पर धनशोधन किए जाने की आशंका जताई है। वर्ष 2022 में आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने इस कथित सट्टेबाजी सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। जांच के दौरान 6000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित धनशोधन से संबंधित जानकारी सामने आने का दावा किया गया था।
महादेव ऐप प्रकरण में वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन सट्टेबाजी के संचालन और इससे जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच अलग-अलग एजेंसियां कर रही हैं। सीबीआई आपराधिक मामलों की जांच कर रही है, जबकि ईडी धनशोधन से जुड़े आरोपों की पड़ताल में जुटी है। सौरभ चंद्राकर के भारत लाए जाने के बाद अब जांच एजेंसियों को इस कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

Comment List