भाजपा ने हरियाणा की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को संकट में धकेला : निजीकरण की ओर बढ़ाये जा रहे कदम, सैलजा ने भाजपा पर लगाए आरोप
विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा शिक्षक भर्ती में देरी का असर
चंडीगढ़। हरियाणा में सिरसा लोकसभा सीट से सांसद कुमारी सैलजा ने राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर सरकारी शिक्षा को कमजोर करने और निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 5,573 वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षक, 8,449 प्राथमिक शिक्षक तथा 2,413 माध्यमिक शिक्षक पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। शिक्षक भर्ती में लगातार हो रही देरी का सीधा असर लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
सांसद ने कहा कि प्रदेश के 968 सरकारी प्राथमिक विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि 22.1 प्रतिशत विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात निर्धारित मानकों से भी खराब है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत है। कुमारी सैलजा ने कहा कि आज भी 63 बस्तियां प्राथमिक विद्यालय, 112 बस्तियां उच्च प्राथमिक विद्यालय, 132 गांव माध्यमिक विद्यालय तथा 215 गांव वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के दावों के बावजूद 691.88 करोड़ रुपये के विकास कार्य लंबित पड़े हैं। विद्यालयों में शिक्षक, भवन और मूलभूत सुविधाओं की कमी से बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का ध्यान शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों के बजाय केवल प्रचार और विज्ञापनों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीति सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, सभी रिक्त पदों पर नियमित शिक्षकों की समयबद्ध भर्ती करने, लंबित विकास कार्य पूरे करने तथा प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा उपलब्ध कराने की है। उन्होंने राज्य सरकार से शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए तत्काल ठोस एवं समयबद्ध कदम उठाने की मांग की।

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