विभागों का बंटवारा हुआ, सियासी तनाव बाकी : शिवकुमार के नेतृत्व की अब होगी असली परीक्षा

मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल पर कितनी मजबूती से नियंत्रण रख पा रहे

विभागों का बंटवारा हुआ, सियासी तनाव बाकी : शिवकुमार के नेतृत्व की अब होगी असली परीक्षा
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंत्रियों के बीच लंबे इंतजार के बाद विभाग बांट दिए। रामलिंगा रेड्डी को वन-पर्यावरण और के.एच. मुनियप्पा को समाज कल्याण मिला। शिवकुमार ने वित्त समेत कई अहम विभाग अपने पास रखे। विभाग आवंटन में देरी से कांग्रेस में खींचतान की चर्चा रही। अब मंत्रियों के प्रदर्शन और सरकार पर मुख्यमंत्री के नियंत्रण की परीक्षा होगी।

बेंगलुरु। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को लंबे इंतजार के बाद मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी को वन एवं पर्यावरण तथा के. एच. मुनियप्पा को समाज कल्याण विभाग दिया गया है, जबकि शिवकुमार ने वित्त समेत कई महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं। विभागों के बंटवारे के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि किस मंत्री को कौन-सा विभाग मिला है, लेकिन इससे एक बड़ा राजनीतिक सवाल भी सामने आया है कि मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल पर कितनी मजबूती से नियंत्रण रख पा रहे हैं।

शिवकुमार ने कहा, पोर्टफोलियो में कोई बदलाव नहीं है। जिन्हें जो विभाग दिए गए हैं, उन्हें आवंटित विभागों का प्रबंधन करना चाहिए। उनका यह संक्षिप्त बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विभागों को लेकर चली खींचतान अब समाप्त हो गयी है। नये मंत्रियों ने तीन अगस्त को शपथ ली थी, लेकिन विभागों के आवंटन में एक सप्ताह से अधिक का समय लग गया। इस दौरान कई महत्वाकांक्षी मंत्रियों के अपने पसंदीदा और महत्वपूर्ण विभागों के लिए दावेदारी जताने की खबरें सामने आती रहीं। कुछ मंत्रियों में असंतोष की खबरों ने भी विभागों के बंटवारे को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी थी। मुख्यमंत्री ने अब विभागों का आवंटन कर इस अध्याय को समाप्त करने की कोशिश की है।

यू. टी. खादर को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के साथ अल्पसंख्यक कल्याण, हज एवं वक्फ विभाग दिया गया है। एम. बी. पाटिल को वाणिज्य एवं उद्योग और जमीर अहमद खान को आवास विभाग मिला है। अजय सिंह को लघु सिंचाई तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग दिया गया है, जबकि एन. चेलुवरायस्वामी को प्रमुख एवं मध्यम सिंचाई विभाग मिला है। मधु बंगारप्पा प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा तथा बसवराज रायरेड्डी उच्च शिक्षा विभाग संभालेंगे। लक्ष्मण सावदी को सहकारिता, रुद्रप्पा लमानी को चीनी एवं कपड़ा तथा शिवराज तंगडगी को पिछड़ा वर्ग कल्याण और कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग दिया गया है। टी. रघुमूर्ति को अनुसूचित जनजाति कल्याण और के. एम. शिवङ्क्षलगे गौड़ा को आबकारी विभाग सौंपा गया है। विभागों की सूची में सबसे अधिक ध्यान उन विभागों पर है जिन्हें मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा है। श्री शिवकुमार ने वित्त के अलावा मंत्रिमंडल कार्य, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार, खुफिया, सूचना, कानून, न्याय एवं मानवाधिकार, संसदीय कार्य एवं विधान, कृषि विपणन तथा अन्य गैर-आवंटित विभाग अपने पास रखे हैं।

वित्त विभाग मुख्यमंत्री के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि सरकार की राजनीतिक घोषणाओं और योजनाओं को लागू करने के लिए अंतत: धन की उपलब्धता इसी विभाग से जुड़ी होती है। वित्त अपने पास रखकर मुख्यमंत्री सरकार की खर्च प्राथमिकताओं और राजनीतिक एजेंडे पर महत्वपूर्ण प्रभाव बनाये रख सकते हैं। विभागों के आवंटन में हुई देरी ने कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। पार्टी नेतृत्व के साथ मंत्रिमंडल गठन और विभागों के बंटवारे पर विचार-विमर्श असामान्य नहीं है, लेकिन मंत्रियों को कई दिनों तक अपने विभागों का इंतजार करना पड़ा, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ पार्टी के भीतर की राजनीतिक खींचतान भी चर्चा में आ गयी। विपक्ष ने भी इस देरी को मुद्दा बनाया। केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) नेता एच. डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि श्री शिवकुमार को जनता के हितों से अधिक मुख्यमंत्री की कुर्सी की चिंता है।

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शिवकुमार के सामने अब बड़ी चुनौती विपक्ष से अधिक अपने मंत्रिमंडल को साथ लेकर चलने की है। विभागों का आवंटन मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन मंत्रियों को आवंटित विभागों से संतुष्ट रखना और उनसे प्रभावी ढंग से काम कराना अलग चुनौती है। पोर्टफोलियो की सूची अब तय हो गयी है, लेकिन राजनीतिक रूप से असली परीक्षा अब शुरू होगी, जब मंत्री अपने-अपने विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे और सरकार के कामकाज में अपनी भूमिका तय करेंगे।

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