घर से दूर पढ़ने वाली छात्राओं के सामने डिजिटल ब्लैकमेल की चुनौती
बदलनी होगी अपनी सोच
आज बड़ी संख्या में बेटियां उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए अपने माता-पिता से दूर दूसरे शहरों में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। वे आत्मनिर्भर बनने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर से निकलती हैं। लेकिन इसी दौरान कुछ छात्राएं ऐसे विषाक्त रिश्तों में फंस जाती हैं, जहां प्रेम के नाम पर उन पर नियंत्रण, दबाव और भावनात्मक अत्याचार किया जाता है। किसी रिश्ते में होना अपराध नहीं है। अपनी पसंद से किसी व्यक्ति से बात करना या उससे प्रेम करना भी अपराध नहीं है। अपराध तब शुरू होता है, जब कोई युवक रिश्ते के नाम पर युवती को नियंत्रित करने लगे, उसे अपमानित करे, दोस्तों और परिवार से दूर करे, उसकी इच्छा के विरुद्ध कुछ करने का दबाव बनाए अथवा उसकी निजी तस्वीरों और वीडियो की मांग करे।
संवेदनशील और भरोसेमंद बताना :
ऐसे युवक शुरुआत में स्वयं को बेहद संवेदनशील और भरोसेमंद बताते हैं। धीरे-धीरे वे युवती का विश्वास जीतकर उसकी निजी जानकारी, तस्वीरें या वीडियो हासिल कर लेते हैं। जब युवती को यह समझ आता है कि यह रिश्ता उसके लिए उचित नहीं है और वह उससे बाहर निकलना चाहती है, तब वही तस्वीरें और बातचीत ब्लैकमेल का हथियार बना दी जाती हैं। धमकी दी जाती है कि तस्वीरें इंटरनेट पर डाल दी जाएंगी, परिवार को भेज दी जाएंगी या कॉलेज और दोस्तों में वायरल कर दी जाएंगी। कई मामलों में पैसे मांगे जाते हैं, जबकि कुछ आरोपी युवती को रिश्ता जारी रखने, मिलने अथवा उसकी इच्छा के विरुद्ध कार्य करने के लिए मजबूर करते हैं।
यह साइबर अपराध है :
यह प्रेम नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न, जबरदस्ती और साइबर अपराध है। गलती पीड़िता की नहीं, अपराध ब्लैकमेल करने वाले का है। हमारे समाज की सबसे बड़ी समस्या यह है कि ऐसी घटना होने पर पीड़िता स्वयं को दोषी समझने लगती है। उसे डर रहता है कि माता-पिता क्या कहेंगे, समाज क्या सोचेगा और कॉलेज में उसकी छवि पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इसी डर का फायदा अपराधी उठाता है।
हर छात्रा और महिला को यह समझना चाहिए कि विश्वास करके किसी को तस्वीर भेज देना, संबंध में आ जाना या बाद में संबंध समाप्त करने का निर्णय लेना किसी व्यक्ति को उसे ब्लैकमेल करने का अधिकार नहीं देता।
ब्लैकमेल करने वाला :
निजी तस्वीर या वीडियो को सहमति के बिना साझा करने की धमकी देना भी गंभीर विषय है। शर्म पीड़िता को नहीं, बल्कि उसके विश्वास का दुरुपयोग करने वाले अपराधी को आनी चाहिए। मैं हमेशा कहता हूं कि महिलाएं हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और भारत के भविष्य की निर्माता हैं। किसी अपराधी की धमकी उनके सपनों, शिक्षा और जीवन से बड़ी नहीं हो सकती। डरकर चुप रहना समाधान नहीं है, क्योंकि एक बार मांग पूरी करने के बाद ब्लैकमेल करने वाला अक्सर नई मांग रख देता है।
शिकायत दर्ज कराएं :
सबसे पहले आरोपी को कोई पैसा न दें और न ही दबाव में आकर उससे मिलने जाएं। उसकी चैट, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया प्रोफाइल, यूजरनेम, धमकियां, बैंक या यूपीआई विवरण और भेजी गई सामग्री के स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। संदेशों को घबराकर डिलीट न करें, क्योंकि यही सबूत आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसके बाद नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन या पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी की जा सकती है। यदि पैसे ट्रांसफर करा लिए गए हों या आर्थिक साइबर धोखाधड़ी हुई हो, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें।
सहायता ली जा सकती है :
जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी ही जल्दी धन के लेन-देन पर कार्रवाई की संभावना बढ़ेगी। महिलाओं और बच्चों से संबंधित कुछ प्रकार की साइबर शिकायतों के लिए पोर्टल पर पहचान बताए बिना रिपोर्ट करने का विकल्प उपलब्ध है। शिकायत करते समय पुलिस अधिकारी को अपनी गोपनीयता और पारिवारिक परिस्थितियों के विषय में स्पष्ट रूप से बताएं। केवल इस डर से शिकायत न रोकें कि माता-पिता को पता चल जाएगा। भरोसेमंद महिला मित्र, शिक्षक, परिजन, वकील या काउंसलर की सहायता भी ली जा सकती है।
बदलनी होगी अपनी सोच :
माता-पिता को अपनी बेटियों के साथ ऐसा रिश्ता बनाना चाहिए कि संकट आने पर उनका पहला विचार यह हो “मुझे घर पर बताना चाहिए”, न कि “घर पर पता चला तो क्या होगा?”बेटी से गलती हो भी जाए, तो उसे डांटने या दोषी ठहराने से पहले उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। परिवार का विश्वास और सहयोग साइबर ब्लैकमेल के विरुद्ध सबसे मजबूत सुरक्षा-कवच बन सकता है।
डिजिटल ब्लैकमेल का सामना कर रही प्रत्येक बेटी से मैं यही कहना चाहता हूं आप अकेली नहीं हैं। डरिए मत, पैसे मत दीजिए, सबूत सुरक्षित रखिए और तुरंत शिकायत कीजिए। एक गलत व्यक्ति आपके पूरे जीवन और भविष्य का निर्णय नहीं कर सकता।
रिश्ता समाप्त करना आपका अधिकार है। आपकी निजी तस्वीर आपकी सहमति के बिना किसी की संपत्ति नहीं बन जाती। आवाज उठाइए, क्योंकि अपराधी की सबसे बड़ी ताकत आपकी चुप्पी है।
-ऋषभ राजेन्द्र पारीक
यह लेखक के अपने विचार हैं

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